जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए भीषण आतंकी हमले के बाद राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उच्च स्तर पर चिंतन चल रहा है। इसी क्रम में जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए 29 अप्रैल तक राज्य के 48 प्रमुख पर्यटक स्थलों को अस्थायी रूप से बंद करने का आदेश जारी किया है।
🔥 हमले की पृष्ठभूमि
22 अप्रैल को अनंतनाग ज़िले के बैसारण वैली में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस हमले में 26 पर्यटकों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, जिनमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए हुए हिंदू, एक ईसाई और एक स्थानीय मुस्लिम पर्यटक भी शामिल थे। हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा की आतंकी शाखा ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी।
🚫 पर्यटन पर रोक का निर्णय
इस गंभीर सुरक्षा स्थिति को देखते हुए जम्मू-कश्मीर पर्यटन विभाग ने गृह विभाग की सलाह और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया है। जिन 48 पर्यटक स्थलों को बंद किया गया है, उनमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
- पहलगाम
- गुलमर्ग
- सोनमर्ग
- डल झील
- तुलिप गार्डन
- वैष्णो देवी की यात्रा (आंशिक प्रतिबंध के साथ)
- युसमर्ग, अरु वैली, दूधपाथरी आदि
यह बंदी 29 अप्रैल की मध्यरात्रि तक लागू रहेगी और आगे की स्थिति की समीक्षा के बाद नया निर्देश जारी किया जाएगा।
👮♂️ सुरक्षा व्यवस्था में वृद्धि
सुरक्षा बलों की संख्या में भारी इजाफा किया गया है। CRPF, BSF और जम्मू-कश्मीर पुलिस के अतिरिक्त बल संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किए गए हैं। हर होटल, लॉज, टूरिस्ट स्पॉट पर तलाशी और निगरानी बढ़ा दी गई है।
🗣️ सरकारी बयान
राज्य पर्यटन मंत्री मोहसिन कादरी ने कहा:
“पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। यह निर्णय कठिन ज़रूर है, लेकिन ज़रूरी था। हम आश्वस्त करते हैं कि जैसे ही स्थिति सामान्य होगी, सभी स्थान पुनः खोले जाएंगे।”
🎒 पर्यटकों की प्रतिक्रिया
कश्मीर में छुट्टियाँ मनाने आए हजारों पर्यटकों को वापस लौटना पड़ा या अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ी। कई विदेशी पर्यटकों ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई, लेकिन सरकार की त्वरित कार्रवाई की सराहना भी की।
🧭 भविष्य की दिशा
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिबंध केवल एक अस्थायी समाधान है, और दीर्घकालिक स्थायित्व के लिए सीमा पार आतंकवाद पर कड़ा रुख ज़रूरी होगा।
निष्कर्ष:
कश्मीर घाटी में खूबसूरती के साथ-साथ चुनौतियाँ भी मौजूद हैं। सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ मिलकर कोशिश कर रही हैं कि जल्द ही हालात सामान्य हों और कश्मीर दोबारा ‘धरती का स्वर्ग’ की तरह खिल उठे।

