- ट्रम्प प्रशासन ने घोषणा की कि 1 जून से यूरोपीय संघ से आयातित सभी वस्तुओं—चाहे कार हों, मशीनरी हो, कपड़े हों—पर 50% टैरिफ लगाया जाएगा ।
- ट्रम्प का कहना है कि यूरोपीय व्यापार समझौतों में अमेरिकी हितों की अनदेखी हुई है और उनकी बातचीत “रद्दी” साबित हुई है ।
- हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि EU या कंपनियाँ अमेरिका में स्थानीय निर्माण करती हैं, तो उन्हें यह टैरिफ नहीं चुकाना पड़ेगा ।
📱 विदेशी-निर्मित स्मार्टफोन (आईफोन सहित) पर 25% टैरिफ
- ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि 25% टैरिफ स्मार्टफोन पर लगेगा, चाहे वे एप्पल के हों या सैमसंग जैसे अन्य ब्रांड्स के ।
- मुख्य उदेश्य है घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना—उन्होंने कहा, यदि कंपनियाँ अमेरिका में फैक्ट्री लगाती हैं तो ये टैरिफ लागू नहीं होंगे ।
- अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इस खबर से एप्पल-कंपनियों के स्टॉक्स गिर गए और डॉलर की कीमतों पर भी असर पड़ा ।
⚖️ प्रतिक्रिया और संभावित असर
- EU नेताओं ने इस कदम की तीखी आलोचना की:
- EU व्यापार आयुक्त मारोष शेफकोविच ने कहा कि “बाजार समझौते सम्मान और सहयोग पर आधारित होने चाहिए, धमकियों से नहीं” ।
- कई यूरोपीय मंत्रियों ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने कार्रवाई की, तो उसपर कड़े जवाबातात्मक कदम उठाए जाएंगे ।
- वित्तीय बाजारों में तुरंत प्रभाव आया:
- अमेरिकी और यूरोपीय शेयरों में तेज गिरावट दर्ज हुई, डॉलर कमजोर हुआ, और निवेशकों ने सुरक्षित विकल्प जैसे सोना चुना ।
🔍 क्यों यह खबर महत्त्वपूर्ण है?
| कारण | विवरण |
|---|---|
| वैश्विक व्यापार युद्ध का नया चरण | ट्रम्प की यह नीति 2018-19 की टैरिफ वार की याद ताज़ा कर देती है, जो नीतिगत अस्थिरता की ओर इशारा करती है। |
| मैन्युफैक्चरिंग पर दबाव | लंबे समय से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता हलचल में आने की आशंका बढ़ाती है। |
| यूजर और उपभोक्ता मूल्य | स्मार्टफोन और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतों में ग्राही लागत बढ़ सकती है, जिससे उपभोक्ता पर बोझ पड़ेगा। |
✅ निष्कर्ष
- 1 जून से EU पर 50% टैरिफ और विदेशी स्मार्टफोन पर 25% टैरिफ—ट्रम्प की “अमेरिका-फर्स्ट” नीति का नया रूप है।
- यह नीति अमेरिकी उत्पादन को बढ़ावा दे सकती है, पर वैश्विक व्यापार में प्रतिशोधात्मक कदम, बाजार अनिश्चितता और बढ़ती कीमतों का भी कारण बन सकती है।

