नई दिल्ली: भारत ने एक बार फिर अपनी संतुलित और परिपक्व कूटनीति का परिचय देते हुए इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच लेबनान को मेडिकल सहायता प्रदान करने का फैसला किया है। यह कदम भारत की वैश्विक भूमिका और मध्य पूर्व में उसकी तटस्थ नीति को दर्शाता है। जहां इजरायल और हिज़बुल्लाह के बीच संघर्ष बढ़ता जा रहा है, वहीं भारत ने दोनों पक्षों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखते हुए एक कूटनीतिक सफलता हासिल की है।
मध्य पूर्व में संघर्ष कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार इजरायल और उसके पड़ोसी देशों के बीच का तनाव काफी गंभीर हो गया है। इजरायल और लेबनान के हिज़बुल्लाह के बीच बढ़ती लड़ाई और इजरायल-ईरान के बीच जारी लंबे समय से चले आ रहे टकराव ने क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर दी है। ऐसे समय में भारत ने न तो किसी एक पक्ष का समर्थन किया और न ही किसी से दुश्मनी मोल ली, बल्कि अपने सभी दोस्तों के साथ खड़ा रहकर संतुलन बनाए रखा।
भारत का यह कदम वैश्विक स्तर पर भी सराहा जा रहा है, क्योंकि कई पश्चिमी और यूरोपीय देश अब इजरायल से दूरी बना रहे हैं। जी7 देशों में से केवल अमेरिका ही ऐसा देश है जो खुलकर इजरायल का समर्थन कर रहा है और उसे हथियारों की आपूर्ति कर रहा है। वहीं, भारत ने किसी भी पक्ष के प्रति झुकाव न दिखाकर यह साबित कर दिया कि वह अपने सिद्धांतों और तटस्थता पर कायम है, और अपने मित्र देशों के साथ संकट की घड़ी में खड़ा रहता है।
लेबनान को मेडिकल सहायता भेजने का फैसला भारत की वैश्विक भूमिका को और मजबूत करता है, जो न केवल मानवीय आधार पर लिया गया है, बल्कि इससे भारत की तटस्थ कूटनीति की भी पुष्टि होती है।

