उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से पूछा है कि क्या वह प्रदेश में हाल ही में लागू समान नागरिक संहिता (यूसीसी) में आवश्यक बदलाव करने के लिए तैयार है। यह सवाल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मनोज तिवारी और न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की खंडपीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से उस जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान किया, जिसमें यूसीसी में लिव इन संबंधों से संबंधित प्रावधानों को चुनौती दी गई थी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इससे पहले, यूसीसी को चुनौती देने वाली एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया था। इस संबंध में दायर सभी याचिकाओं पर एक अप्रैल को सुनवाई होगी। जनहित याचिका में भी लिवइन पंजीकरण फार्म में सूचनाएं मांगे जाने पर आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह प्रावधान युगल की निजता का उल्लंघन करता है।

