जिले के करेली में शहीद भगत सिंह की जयंती पर गुरुद्वारा गुरु सिख समाज करेली द्वारा पुरानी गल्ला मंडी चौराहे पर अष्टधातु से निर्मित भगत सिंह की प्रतिमा का अनावरण किया गया। इस मौके पर कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल मौजूद रहे और शहीद भगत सिंह की जीवनी पर प्रकाश डाला।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने अपने उद्बोधन के दौरान कहा, जीवन सबको मिलता है, लेकिन जीवन जीवनी बने, ऐसा कार्य बहुत कम लोगों के हिस्से में आता है। राष्ट्रवाद के लिए आयु महत्वपूर्ण नहीं होती, संकल्प महत्वपूर्ण होता है। जब मैं शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की बात करता हूं, तो मुझे आज भी याद है जब पंजाब में पहली बार 7 दिन का आपातकाल लगा था। मैं उस समय अमृतसर में था और जल्दी से वहां से निकल रहा था।
तब स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी के पास एक पुस्तक थी, जिसमें सरदार भगत सिंह की फांसी से जुड़े मूल दस्तावेज शामिल थे। लेकिन दुर्भाग्यवश, वह पुस्तक उस समय इस देश में प्रतिबंधित कर दी गई थी। मैंने वह पुस्तक ट्रेन में बैठे-बैठे पढ़ी और यह मेरे जीवन का एक अनोखा अनुभव था।
प्रेरणा के लिए भगत सिंह जैसा व्यक्तित्व मिलना असंभव है। जब उनका फांसी का फैसला हुआ, तो उन्होंने अपने वकील से कहा कि मेरी पुस्तक लेकर आइए। वकील साहब पुस्तक लेकर आए और भगत सिंह उसे पढ़ रहे थे। जब उनका फांसी का समय आ गया, तो उन्होंने पुलिसवालों से मात्र इतना ही कहाकृ ’मुझे दो मिनट का समय और चाहिए।’ यह वैचारिक निष्ठा ही थी, जो उन्हें मौत को चुनौती देने की शक्ति प्रदान कर रही थी।
मंत्री पटेल ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा की आज के नौजवानों को शहीदों की सामर्थ्य को अपनाना चाहिए, स्वयं की रक्षा के लिए और समाज की रक्षा के लिए। यदि वैचारिक सामर्थ्य है, तो व्यक्ति मौत को भी चुनौती दे सकता है।