वक़्फ़ एक्ट पर केंद्र सरकार ने लगाई अस्थायी रोक, 5 मई तक निलंबित रहेंगी कुछ धाराएं

वक़्फ़ एक्ट पर केंद्र सरकार ने लगाई अस्थायी रोक, 5 मई तक निलंबित रहेंगी कुछ धाराएं


नई दिल्ली, 19 अप्रैल 2025 – केंद्र सरकार ने वक़्फ़ क़ानून (Waqf Act, 1995) की कुछ धाराओं के अमल पर 5 मई 2025 तक अस्थायी रोक लगा दी है। यह फ़ैसला देश की सर्वोच्च अदालत, सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका पर सुनवाई के मद्देनज़र लिया गया है, जहां वक़्फ़ एक्ट की वैधता और इसके तहत दी गई शक्तियों पर सवाल उठाए गए हैं।

क्या है मामला?

सुप्रीम कोर्ट में पिछले कुछ समय से कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं, जिनमें आरोप लगाया गया था कि वक़्फ़ बोर्डों को असीमित अधिकार देकर निजी व सरकारी संपत्तियों पर दावा करने की अनुमति दी जा रही है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और 300A (संपत्ति का अधिकार) का उल्लंघन करता है।

याचिकाकर्ताओं ने विशेष रूप से वक़्फ़ बोर्डों द्वारा “स्वघोषित संपत्तियों” को वक़्फ़ घोषित करने की प्रक्रिया को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि बिना न्यायिक प्रक्रिया के किसी संपत्ति को वक़्फ़ घोषित कर देना नागरिक अधिकारों पर सीधा हमला है।

सरकार का रुख़

केंद्र सरकार ने 19 अप्रैल को एक नोटिफिकेशन जारी कर बताया कि वक़्फ़ क़ानून की कुछ विवादित धाराओं को “जनहित एवं न्यायिक प्रक्रिया के सम्मान में” 5 मई तक के लिए निलंबित किया जा रहा है। इन धाराओं में वक़्फ़ संपत्ति की पहचान, अधिग्रहण और विवाद निपटान से जुड़ी प्रक्रियाएं शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार, सरकार इस मुद्दे पर व्यापक कानूनी सलाह ले रही है और संभावना है कि संसद के आगामी सत्र में वक़्फ़ एक्ट में संशोधन संबंधी विधेयक पेश किया जा सकता है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह “अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता पर अप्रत्यक्ष हमला” है। कांग्रेस और AIMIM जैसी पार्टियों ने मांग की है कि सरकार स्थिति स्पष्ट करे और सुनिश्चित करे कि किसी भी क़ानूनी बदलाव से समुदायों के अधिकार प्रभावित न हों।

वक़्फ़ बोर्डों की प्रतिक्रिया

अखिल भारतीय वक़्फ़ बोर्ड समन्वय समिति के अध्यक्ष ने इस निर्णय पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा, “यदि कुछ तत्व वक़्फ़ संपत्ति को अवैध रूप से हथियाने की कोशिश कर रहे हैं, तो सरकार को उन पर कार्रवाई करनी चाहिए, न कि पूरी व्यवस्था को ठप करना चाहिए।”

आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 2 मई को निर्धारित है, जिसमें केंद्र सरकार से जवाब मांगा गया है कि वह वक़्फ़ एक्ट की पारदर्शिता और वैधता सुनिश्चित करने के लिए क्या क़दम उठा रही है।


विशेष टिप्पणी:
वक़्फ़ क़ानून मुस्लिम समुदाय के धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण आधार रहा है। ऐसे में इसके कानूनी ढांचे पर सवाल उठना और सरकारी प्रतिक्रिया का न्यायिक जांच के तहत आना, देश में धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन और अधिकारों को लेकर एक नई बहस की शुरुआत है।