जेएनयू छात्रसंघ चुनाव 2025 – वाम गठबंधन का दबदबा, ABVP को एक सीट

जेएनयू छात्रसंघ चुनाव 2025 – वाम गठबंधन का दबदबा, ABVP को एक सीट


जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में 25 अप्रैल को हुए छात्रसंघ चुनाव के परिणाम आज घोषित हुए, जिसमें वामपंथी गठबंधन (AISA–DSF) ने सेंट्रल पैनल के चार में से तीन पदों पर कब्जा जमाया। वहीं, ABVP ने नौ वर्षों के बाद एक केंद्रीय पद जीतकर राजनीतिक वापसी की है ।

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🏆 पदों का रिज़ल्ट

पदविजेतावोट
अध्यक्ष (President)नीतीश कुमार (AISA)1,702
उपाध्यक्ष (Vice President)मनीषा (DSF)1,150
महासचिव (General Secretary)मुंतेहा फ़ातिमा (DSF)1,520
संयुक्त सचिव (Joint Secretary)वैभव मीणा (ABVP)1,518

– निकटतम विरोधी उम्मीदवारों के मुकाबले नीतीश कुमार ने ABVP की शिखा स्वरज को 272 वोटों से हराया। मनीषा ने एबीवीपी की निट्टू गौतम को मात्र 34 वोटों से मात दी, जबकि मुंतेहा ने ABVP के कुणाल राय को 114 वोटों से पीछे छोड़ा। उस्फ़र, वैभव ने संयुक्त सचिव का पद एबीवीपी को वापस दिलाया, जो 2015–16 के बाद पहली केंद्रीय जीत है ।


👥 विजेताओं की पृष्ठभूमि

  • नीतीश कुमार (26): बिहार के अररिया जिले से, किसान परिवार से आते हैं। JNU में राजनीति छात्र नेता के रूप में सक्रिय, ‘रीओपन जेएनयू’ आंदोलन के प्रमुख थे ।
  • मनीषा (27): हरियाणा की दलित मजदूर परिवार की पीएचडी छात्रा, महिला नेतृत्व का उदाहरण बताते हुए कहा: “जेएनयू लाल था और लाल ही रहेगा…” ।
  • मुंतेहा फ़ातिमा (28): पटना की ओबीसी मुसलमान किसान परिवारीय पृष्ठभूमि से, वे वेस्ट एशियन स्टडीज में पीएचडी कर रही हैं ।
  • वैभव मीणा (जॉइंट सेक्रेटरी): राजस्थान के आदिवासी किसान परिवार से, हिंदी साहित्य में पीएचडी स्कॉलर होने के साथ ABVP की वापसी का प्रतीक बने ।

📣 विजेताओं के मुख्य संदेश

  • नीतीश कुमार ने छात्रों के कल्याण, कैंपस फंड की बहाली, जेएनयू प्रवेश परीक्षा की पुनर्स्थापना और CPO प्रोटेस्ट मैन्युअल को हटाने का संकल्प व्यक्त किया ।
  • मनीषा ने महिला सुरक्षा, छात्रावास सुधार, फीस वृद्धि, लैंगिक समानता और GSCASH जैसी संस्थाओं को फिर से बहाल करने की बात कही ।
  • मुंतेहा ने छात्र अधिकारों, सेक्युलर संगठन, और पॉलिटिकल प्रिजनर्स की रिहाई की मांग पर जोर व्यक्त किया ।
  • वैभव मीणा ने कहा कि यह जीत आदिवासी चेतना और राष्ट्रवादी विचारधारा की विजय है; इसके साथ–साथ CPO मैन्युअल हटाने पर भी नेम बनाए ।

🧭 चुनावी पृष्ठभूमि और आंकड़े

  • इस चुनाव में कुल लगभग 5,500 छात्रों ने मतदान किया, जिसमें लगभग 70–73% की मतदान दर रही ।
  • वामपंथी खेमे में इसबार दो हिस्सों के चलते उम्मीदवारों का विभाजन था—AISA+DSF की एक और SFI+AISF+BAPSA+PSA की दूसरी अलायंस; बावजूद इसके AISA–DSF ने जीत हासिल की ।
  • ABVP ने 42 काउंसलर सीटों में से 23 सीटें जीती, जो पिछले दस सालों में उनका सर्वोत्तम प्रदर्शन है ।

🧠 निष्कर्ष

वाम गठबंधन की यह जीत JNU में वाम विचारधारा की मजबूत स्थिति को जारी रखती है। वहीं, ABVP की वापसी एक रणनीतिक संकेत है कि कैंपस् में विचारधाराएँ बदल रही हैं। विजेताओं ने शिक्षा में समानता, छात्र अधिकार, लैंगिक सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बहु-आयामी लड़ाई की प्रतिबद्धता जताई है।