भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव के मद्देनज़र भारत सरकार ने एक अहम निर्णय लेते हुए 7 मई 2025 को पूरे देश में सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल आयोजित करने का निर्देश दिया है। यह निर्णय गृह मंत्रालय द्वारा लिया गया है और इसका उद्देश्य आम नागरिकों को आपातकालीन स्थितियों के लिए तैयार करना है।
पृष्ठभूमि: पहलगाम आतंकी हमला और उसके बाद की स्थिति
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुए एक आतंकी हमले ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया था। इस हमले में सेना के जवानों और स्थानीय नागरिकों को निशाना बनाया गया, जिससे पूरे देश में आक्रोश और चिंता का माहौल बन गया। इसके बाद भारत ने सीमा सुरक्षा को और कड़ा करते हुए कई रणनीतिक कदम उठाए।
गृह मंत्रालय का निर्देश: मॉक ड्रिल क्यों?
गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 7 मई को “ऑल इंडिया सिविल डिफेंस ऑब्ज़रवेंस डे” के तहत मॉक ड्रिल आयोजित करने का आदेश दिया है।
इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य निम्नलिखित है:
- आपातकालीन स्थिति में आम नागरिकों की प्रतिक्रिया क्षमता को परखना
- बचाव एवं राहत कार्यों की वास्तविक स्थिति का परीक्षण
- पुलिस, सेना, दमकल और चिकित्सा सेवाओं के बीच समन्वय को मजबूत करना
- जनता को सतर्क रहने और भागीदारी की आदत डालना
मॉक ड्रिल में क्या होगा शामिल?
- एयर रेड सायरन, बम अलर्ट और रेस्क्यू ऑपरेशन जैसे दृश्य
- स्कूलों, कॉलेजों, दफ्तरों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मॉक निकासी अभ्यास
- स्थानीय पुलिस, सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स, NDRF और SDRF की भागीदारी
- मीडिया के माध्यम से जनता को जागरूक करने वाले कार्यक्रम
जनता से अपील: अफवाहों से बचें, सहयोग करें
गृह मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि मॉक ड्रिल को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाहों पर विश्वास न करें। यह सिर्फ एक अभ्यास है, कोई वास्तविक खतरा नहीं है। सभी नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे प्रशासन का सहयोग करें और निर्देशों का पालन करें।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आईं सामने
इस मॉक ड्रिल के ऐलान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ विपक्षी दलों ने इसे “आतंक के नाम पर भय का माहौल बनाने की कोशिश” बताया, जबकि सरकार समर्थकों ने इसे “समय की जरूरत” कहा है।
निष्कर्ष: सुरक्षा के प्रति सतर्कता ही बचाव है
भारत-पाक तनाव की मौजूदा स्थिति में यह कदम राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा और नागरिक सहभागिता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों और नागरिकों के बीच सामंजस्य और सहयोग ही किसी भी आपात स्थिति में हमारी सबसे बड़ी ताकत साबित हो सकती है।

