ऑपरेशन अभ्यास — देशव्यापी मॉक ड्रिल

ऑपरेशन अभ्यास — देशव्यापी मॉक ड्रिल


ऑपरेशन अभ्यास, जिसे अंग्रेज़ी में Operation Abhyaas कहा गया, 7 मई 2025 को भारत सरकार तथा एनडीएमए (NDMA) की अगुवाई में आयोजित एक विशाल नागरिक रक्षा ड्रिल थी। इसका मकसद देशभर में नागरिकों और आपदा-प्रबंधन संस्थाओं को संभावित दुश्मन हमलों, हवाई हमलों, ब्लैकआउट, अग्नि और बचाव अभियानों से निपटने के लिए तैयार करना था ।


🌍 पृष्ठभूमि

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले (26 नागरिकों की मौत) के बाद भारत-पाक सीमा पर तनाव बढ़ गया। इस तनाव के बीच केंद्र ने घोषणा की कि 7 मई को पूरे देश में ‘ऑपरेशन अभ्यास’ नामक ड्रिल होगी, जिसमें 244 ज़िले शामिल किए गए, जिनमें सारी महत्वपूर्ण सीमा-राज्य और संवेदनशील क्षेत्र शामिल थे ।


📅 समय-रेखा व गतिविधियाँ

  • समय: अधिकांश जगहों पर ड्रिल 4:00 PM IST से शुरू हुई और लगभग दो घंटे तक चली ।
  • मुख्य क्रियाएँ:
    • एयर-रेड एलर्ट के लिए सायरन बजाना
    • ब्लैकआउट ड्रिल (अनशासनपूर्वक बिजली बंद करना)
    • इमारतों से नागरिकों का तुरंत निकास और बचाव
    • अग्निशमन एवं मेडिकल राहत अभ्यास
    • अस्थायी अस्पतालों एवं बंकरों का संचालन
    • नियंत्रण कक्षों और आपदा प्रबंधन बिंदुओं का परीक्षण ।

🏙️ प्रमुख शहरों का योगदान

  • दिल्ली
    55 जगहों पर ड्रिल की गई, जिनमें सायरन बजाए गए और हजारों विशिष्ट एजेंसी कर्मियों ने भाग लिया। प्रमुख स्थानों में खान मार्केट, सिलेक्ट सिटीडॉक मॉल, चांदनी चौक और एनडीएमसी भवन शामिल थे ।
  • मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, चेन्नई
    • मुंबई में स्टेशन, पोर्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रिल हुई ।
    • Pune में छह जगहों पर सर्च, रेस्क्यू और ब्लैकआउट ड्रिल हुई ।
    • Bengaluru में Civil Defence मुख्यालय में सायरन, ब्लैकआउट, अग्नि एवं बचाव अभ्यास किया गया ।
    • Hyderabad में Outer Ring Road के आसपास 4–4:30 PM तक ड्रिल हुई ।
  • राज्य-स्तर निर्माण
    • पंजाब के 20 जिलों में कार्यशालाएं,
    • राजस्थान में जोधपुर में सायरन और आपात प्रोटोकॉल पर फोकस ।
    • छत्तीसगढ़ के दुर्ग में ड्रिल ने छात्रों और नागरिकों में थोड़ी अफरा-तफरी पैदा की ।

👥 सहभागिता और तैयारी

  • सहभागी: गृह रक्षाकर्मी, एनसीसी, एनएसएस, एनवाईकेएस, होम गार्ड्स, नागरिक रक्षा स्वयंसेवक, पुलिस, अग्निशमन और मेडिकल टीमें ।
  • आवश्यक निर्देश:
    • नागरिकों को सायरन सुनते ही सुरक्षित आश्रय में जाने हेतु कहा गया।
    • ब्लैकआउट के दौरान धैर्य बनाए रखने की अपील की गई ।

✅ उपलब्धियाँ और नतीजे

  • यह 1971 के बाद सबसे बड़ा नागरिक रक्षा अभ्यास था ।
  • अंतःक्रियात्मक समन्वय परखने में सफलता, जैसे सायरन सिस्टम्स जांच, नियंत्रण कक्ष कार्य, और Evacuation Timelines ।
  • दिल्ली में 60 सायरन ब्लेयर हुए और 15 मिनट का ब्लैकआउट सफलतापूर्वक पूरा हुआ, बिना किसी बड़ी समस्या के ।
  • पुणे, कोलकाता, लखनऊ, भुवनेश्वर, भोपाल में ड्रिल जनता और अधिकारियों दोनों के लिए जागरूकता और प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण मंच साबित हुई ।

🌟 निष्कर्ष

ऑपरेशन अभ्यास ने दिखाया कि भारत नागरिक रक्षा और आपदा प्रबंधन का एक समग्र, संयुक्त संरचित मंच तैयार करने की दिशा में अग्रसर है। जानकारियों के आदान-प्रदान, समय-संवेदनशील अलर्ट सिस्टम्स और हर स्तर पर नागरिक सहभागिता इसे एक सफल राष्ट्रव्यापी पहल बनाती है।