🔹 कूटनीतिक पृष्ठभूमि
- 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद तनाव चरम पर पहुंचा, जिसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
- सीमा पर तोपखाने की गोलाबारी, एयरबेस पर हमले और ड्रोन-स्वॉर्म जैसे जटिल घटनाक्रम ने क्षेत्रीय स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
🔹 मध्यस्थता और वार्ता
- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो की कूटनीतिक पहल के तहत शांति वार्ता शुरू हुई।
- अमेरिकी संवाद से प्रेरित हो कर 10 मई की शाम तक भारत-पाकिस्तान ने राष्ट्रीय अभियानों और मिसाइल-हमले दोनों को रोकने पर सहमति जताई—‘पूर्ण और तत्काल युद्धविराम’ लागू होने की घोषणा हुई।
🔹 औपचारिक घोषणा
- भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि “युद्धविराम शाम 5 बजे IST से प्रभावी हुआ, दोनों देशों के डीजीएमओ (सैन्य महानिदेशक) की बातचीत के बाद” ।
- पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने सोशल मीडिया पर पुष्टि की।
- ट्रंप ने इस समझौते की सराहना करते हुए इसे “समझदारी भरा फैसला” बताया और मध्यस्थता में अमेरिका की भूमिका की प्रशंसा की ।
🔹 निभान और उल्लंघन की आशंका
- हालांकि घोषणा के तुरंत बाद कश्मीर में तेज आवाज़ें, तोपखाने की गोलाबारी और ड्रोन की गतिविधियों की रिपोर्ट मिली।
- जम्मू–कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने ‘गंभीर उल्लंघन’ की आशंका जताई। भारत और पाकिस्तान ने एक-दूसरे पर सीजफायर तोड़ने का आरोप लगाने शुरू कर दिया।
- पाक सूचना मंत्री अता तरार ने भारत के आरोपों को “बिल्कुल निराधार” बताया ।
🔹 अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
- ट्रम्प, रुबियो और न्यूक्लियर शक्तिसंपन्न देशों—यूके, सऊदी अरब, क़तर समेत कई देशों ने संयम एवं कूटनीतिक पहल की मांग की।
- संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने परमाणु-जोखिम पर चिंता व्यक्त की और वार्ता जारी रखने का आग्रह किया।
🔹 आगे का रास्ता
- स्थायी शांति:
- केवल युद्धविराम नहीं, बल्कि स्थायी समाधान के लिए बातचीत और भरोसेमंद संस्थाएँ चाहिए।
- सीमा निगरानी:
- डीजीएमओ लेवल पर हॉटलाइन का नियमित सक्रिय और उल्लंघनों की तत्पर पहचान आवश्यक।
- प्रभावित क्षेत्रों का मानव रक्षा:
- जहरीले आक्रमण अथवा गलती से हुई घटनाओं से निपटने के लिए गाँवों की तैयारी, मेडिकल भंडार, नागरिक जागरूकता बढ़ाना।
- ग्लोबल लैन्डस्केप में संतुलन:
- बताया जा रहा है कि आर्थिक दबाव, वैश्विक कूटनीति और परमाणु मोहभंग ने दोनों देशों को संयम पर लाया ।
✒️ निष्कर्ष
9–10 मई के युद्धविराम ने भारत–पाकिस्तान की ताज़ा लड़ाई को सैनिक लड़ाई से आगे बढ़ने से रोका। अमेरिकी मध्यस्थता ने इसमें निर्णायक भूमिका निभाई, लेकिन तुरन्त रिपोर्ट की गई घटनाओं से स्पष्ट है कि संघर्ष उत्पादन दबाव अभी भी बना हुआ है। राजनीति के साथ-साथ सीमावर्ती नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब प्राथमिक हो गया है।

