📅 कब और कहाँ
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 13 मई 2025 को देशव्यापी ‘तिरंगा यात्रा’ शुरू की, जो 23 मई तक चलेगी। यह यात्रा “ऑपरेशन सिंदूर” की सैन्य उपलब्धियों व सशस्त्र बलों की वीरता को जनता तक पहुँचाने के उद्देश्य से आयोजित की गई है ।
🎯 प्रमुख उद्देश्य
- भारत की राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना को जाग्रूत करना
- सेना की बहादुरी और सैन्य सफलता को सम्मानित करना, विशेषकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद
- लाखों नागरिकों को तिरंगे के साथ जोड़ना
एक BJP नेता ने कहा,
“यह यात्रा लोगों को देशभक्ति और सम्पूर्ण एकजुटता का संदेश देगी, और यह किसी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं”
🛵 यात्रा का स्वरूप
- बाइक रैलियाँ, सार्वजनिक समारोह, फ्लैग होल्डिंग इवेंट्स
- स्कूल-कॉलेजों में विशेष कार्यक्रम, दरवाज़े-दारवाज़े जनता से संवाद
- अग्रणी शहरों में आयोजित होने वाली यात्राएं जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, अमृतसर, पटना, लखनऊ आदि ।
👥 परिचालन संरचना
केंद्रीय नेतृत्व में शामिल थे:
- जेपी नड्डा, अमित शाह, राजनाथ सिंह, और अन्य वरिष्ठ नेता – जिन्होंने 11 मई को इसकी रूपरेखा तैयार की ।
- राज्य स्तर पर जिला, मंडल और पीठ पर विशेष आयोजन
- पूर्व सैनिक, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक समाज के सौजन्य से यात्राओं को गति दी गई ।
📍 प्रमुख राज्यों और घटनाएँ
- दिल्ली: ‘शौर्य सम्मान यात्रा’ में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने भाग लिया ।
- बिहार (पटना): महाराणा प्रताप की मूर्ति से प्रारंभ, करगिल मेमोरियल तक 120 फुट लम्बे राष्ट्रीय ध्वज के साथ यात्रा आयोजित की गई ।
- मध्य-प्रदेश (अशोकनगर): महिला मोर्चा कमांडर की दीवार चित्रकला और राष्ट्रगान के संगीत में विशेष कार्यक्रम ।
- पश्चिम बंगाल (कोलकाता): महिला मोर्चा ‘ऑपरेशन सिंदूर’-प्रेरित शक्ति प्रदर्शन में अग्रणी ।
🗣️ राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
- शिवसेना (उद्धव गुट): आरोप लगाया कि यात्रा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के वास्तविक प्रतिशोध के बजाय राजनीतिक प्रचार का हिस्सा है ।
- कांग्रेस: बहस तेज़ हुई कि क्या ये आयोजन देशभक्ति या सार्वजनिक समर्थन जुटाने का माध्यम है ।
🔍 निष्कर्ष
- राष्ट्रीय स्तर पर भव्य आयोजन: 11 दिनों में कवर की गई कई यात्राओं में तिरंगा देश को एक साथ जोड़ने का प्रयास रहा।
- अभिव्यक्ति ही नहीं, संदेश का प्रसार: युवा, पूर्व सैनिक, साहित्यकार, छात्र सभी ने हिस्सा लिया।
- राजनीतिक विमर्श भी उभरा: यात्रा को लेकर देश में नई बहस शुरू हुई—क्या यह असली देशभक्ति या रणनीतिक जनसमूह निर्माण है?

