ऑपरेशन सिंदूर के बाद ‘सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल’ विदेश रवाना: भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रखा आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख

ऑपरेशन सिंदूर के बाद ‘सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल’ विदेश रवाना: भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रखा आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख


पुलवामा और जहाँगीर क्षेत्र में हुए आतंकी हमलों के बाद भारत सरकार ने एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाते हुए सात सांसदों का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल विदेश भेजा है। यह प्रतिनिधिमंडल दुनिया के प्रमुख देशों में जाकर आतंकवाद के खिलाफ भारत का पक्ष रखेगा और पड़ोसी देशों द्वारा प्रायोजित आतंकवाद की गंभीरता से वैश्विक समुदाय को अवगत कराएगा।

🔴 पृष्ठभूमि: ऑपरेशन ‘सिंदूर’

11 मई को हुए जहाँगीर और पुलवामा हमलों में भारतीय सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को बड़ी क्षति हुई थी। इसके बाद भारत ने सीमावर्ती क्षेत्रों में ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जिसमें भारतीय सेना ने कई आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त किया। यह ऑपरेशन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकी प्रशिक्षण शिविरों को निशाना बनाने के लिए किया गया था।

ऑपरेशन के सफल समापन के बाद, सरकार ने कूटनीतिक मोर्चे पर भी दबाव बनाना शुरू किया।


🏛️ प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल हैं?

इस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में भारतीय संसद के सात वरिष्ठ सांसद शामिल किए गए हैं, जिनमें विभिन्न प्रमुख राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व है:

  • सुरेश प्रभु (भाजपा)
  • शशि थरूर (कांग्रेस)
  • जया बच्चन (सपा)
  • प्रेमचंद अग्रवाल (बीजेपी)
  • एम. के. स्टालिन के प्रतिनिधि (DMK)
  • महुआ मोइत्रा (TMC)
  • ओवैसी के प्रतिनिधि (AIMIM)

इन नेताओं का चयन इस उद्देश्य से किया गया है ताकि भारत की स्थिति को अराजनीतिक और सर्वसम्मत स्वर में दुनिया के सामने रखा जा सके।


🌍 किन देशों में जाएगी टीम?

प्रतिनिधिमंडल की यात्रा में निम्नलिखित देश शामिल हैं:

  1. संयुक्त राज्य अमेरिका (वाशिंगटन डीसी, न्यूयॉर्क)
  2. ब्रिटेन (लंदन)
  3. फ्रांस (पेरिस)
  4. जर्मनी (बर्लिन)
  5. संयुक्त राष्ट्र (UN Headquarter, न्यूयॉर्क)
  6. स्विट्ज़रलैंड (जिनेवा – मानवाधिकार परिषद)

🎯 उद्देश्य क्या है?

प्रतिनिधिमंडल का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित है:

  • पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का प्रमाण प्रस्तुत करना
  • वैश्विक समुदाय से भारत के साथ खड़े होने की अपील
  • FATF जैसी संस्थाओं में पाकिस्तान पर दबाव बनाने की रणनीति
  • भारत की कूटनीतिक नीति को वैश्विक समर्थन दिलाना
  • संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार परिषद में आतंकवाद की निंदा कराना

🔍 सरकार की मंशा स्पष्ट

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा:

“यह सिर्फ सैन्य कार्रवाई का मामला नहीं है। यह भारत की संप्रभुता, नागरिक सुरक्षा और वैश्विक न्याय की बात है। हमें सिर्फ सीमा पर नहीं, वैश्विक मंचों पर भी आवाज बुलंद करनी होगी।”


🌐 विश्व समुदाय की प्रतिक्रिया

अमेरिका, फ्रांस और जापान ने भारत के इस कदम की प्रशंसा की है और आश्वासन दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ हर स्तर पर सहयोग किया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी भारत की चिंता को ‘सार्थक और आवश्यक’ बताया।


📌 निष्कर्ष

ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत का यह कूटनीतिक कदम स्पष्ट रूप से यह दिखाता है कि अब आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सीमित सीमा क्षेत्रों तक नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीतिक मंचों तक फैली हुई है। भारत अपनी सुरक्षा को लेकर पहले से कहीं अधिक सक्रिय, सजग और एकजुट दिखाई दे रहा है।