केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल आज वाशिंगटन पहुंच चुके हैं, जहाँ वे 16–20 मई के बीच होने वाली चार दिवसीय वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं।
🗓️ वार्ता की रूपरेखा
- गोयल 16 मई को वॉशिंगटन पहुंचे।
- 17 से 20 मई तक मंत्री-स्तरीय बैठकें आयोजित होंगी।
- 19–22 मई को मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल और अमेरिकी सहकर्मी ग्रीर–लुटनिक विस्तार से तकनीकी मुद्दों पर चर्चा करेंगे ।
🎯 वार्ता के प्रमुख एजेंडे
- बीटीए की रूपरेखा तय करना
दोनों देश “इंटरिम अर्थव्यवस्था सहमति” (interim trade arrangement) की राह देख रहे हैं, ताकि पहले चरण का समझौता सितंबर–अक्टूबर 2025 तक अंतिम रूप ले सके । - टैरिफ और बाज़ार पहुंच
- अमेरिका चाहता है कि भारतीय बाज़ार में ऑटो, वाइन, डेयरी, तथा सेब जैसे कृषि उत्पादों को आसान पहुंच मिले ।
- भारत अपनी तरफ से उद्योगों में शुल्क राहत, विशेषकर कपड़ा, रत्न, चमड़ा, रसायन, झींगा, केले आदि श्रम-गहन सेक्टर हेतु रियायत माँग रहा है।
- इस्पात और एल्युमिनियम पर अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ पर भारत ने प्रतिकारात्मक शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है ।
- संयुक्त समय सीमाएँ
अमेरिकी 26% अतिरिक्त टैरिफ को 9 जुलाई तक स्थगित रखा गया है, पर 10 % मौलिक शुल्क अभी लागू है। वार्ता का प्रयास इस रोक के भीतर “जल्दी लाभ” सुनिश्चित करना है । - राजनीतिक मार्गदर्शन
मंत्री-स्तरीय बैठकें अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक और व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के साथ होंगी, जबकि तकनीकी वार्ता राजेश अग्रवाल और अमेरिकी सहकर्मी के बीच होगी ।
🌍 वैश्विक परिप्रेक्ष्य एवं रणनीति
- भारत और अमेरिका पहले फेज की समझौता प्रक्रिया को फॉल 2025 में पूरा करने का लक्ष्य रखते हैं ।
- विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वार्ता से पहले ही स्पष्ट किया कि अभी कोई फाइनल समझौता नहीं हुआ है, चर्चा अभी जारी है ।
🧭 भारत की प्राथमिकताएँ
- भारत राष्ट्रीय हित, खेती और खाद्य सुरक्षा, एवं रोज़गार सृजन को सर्वोच्चता देगा।
- किसानों के समूह वार्ता से कृषि सेक्टर को मुक्त रखना चाहते हैं, ताकि खाद्य संप्रभुता बनी रहे ।
📌 संक्षिप्त सारांश
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| समय | 16–22 मई 2025 |
| नेतृत्व | मंत्री गोयल एवं मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल |
| प्रमुख मुद्दे | टैरिफ, बाज़ार पहुंच, गैर-टैरिफ बाधाएँ, शुल्क विराम |
| लक्ष्य | प्रथम चरण बीटीए– सितंबर–अक्टूबर 2025 |
| रणनीति | राष्ट्रीय हित और रोजगार-प्रायोरिटी के आधार पर संतुलन |
भारतीय वाणिज्य मंत्रालय और व्यापार समुदाय का मानना है कि यह वार्ता केवल मात्रा की सोच नहीं, बल्कि गुणवत्ता युक्त और दोनों पक्षों के लिए लाभदायक समझौते पर केंद्रित है। यह वार्ता भारत–अमेरिका संबंधों को नए आयाम पर ले जाने तथा वैश्विक व्यापार में नए अवसर खोलने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है।

