“रंग बदलने वाला छिपकली” — ईश्वरनाथ शिंदे का उद्धव ठाकरे पर हमला

“रंग बदलने वाला छिपकली” — ईश्वरनाथ शिंदे का उद्धव ठाकरे पर हमला


महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री ईश्वरनाथ शिंदे ने विधान परिषद में एक तीखे शब्दों में शिव सेना (हालाँकि अब ‘UBT’ या उद्धव ठाकरे की शिव सेना के नाम से जानी जाती है) के प्रमुख उद्धव ठाकरे पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने ठाकरे को “छिपकली की तरह रंग बदलने वाला” बताया और उन पर 2019 में हुए गठबंधन के टूटने और अवसरवादी राजनीति का आरोप लगाया ।


🔍 प्रमुख आरोप

  1. राजनीतिक विश्वासघात और अवसरवाद
    शिंदे ने कहा कि ठाकरे ने 2019 में भाजपा के साथ टूटकर कांग्रेस की ओर रुख किया, जो उनके अनुसार “छिपकली जैसा रंग बदलना” था। उन्हें “रासायनिक लोंचा” राजनीति का प्रतीक कहा गया ।
    1. भ्रष्टाता की कथितता और अनुत्तरदायित्व

    शिंदे ने यह भी बताया कि देवेंद्र फडणवीस ने 2019 चुनावों के बाद ठाकरे को लगभग 40–50 कॉल किए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला, जिससे स्पष्ट हुआ कि गठबंधन टूटने में उनकी भूमिका थी ।
    1. मराठी और संस्कृति संबंधी आरोप

    उन्होंने ठाकरे की मराठी पहचान और भाषा को लेकर हालिया टिककों (जैसे लता मंगेशकर विश्वविद्यालय प्रस्ताव वापस लेना, हिंदी इम्पोज़िशन पर उठाए गए स्टैंड) का भी ज़िक्र किया कि ये सब चुनावी राजनीति का हिस्सा था ।

📜 इतिहास का संदर्भ

  • 2017 का सौहार्द
    शिंदे ने याद दिलाया कि 2017 में मिंबा नगर निगम चुनावों के दौरान बीजेपी से शिवसेना को मेयर का पद शिंदे की पहल पर ही मिला था।
  • 2019 का टूटाव
    ठाकरे-भाजपा गठबंधन के टूटने को शिंदे ने “विश्वासघात” बताया, विशेषकर इसलिए कि शर्मा द्वारा गठबंधन समाप्त करने के पहले समय में कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला ।
  • 2022 का विद्रोह
    शिंदे ने दावा किया कि जब वह और उनके साथियों ने गुवाहाटी में शिवसेना (UBT) से अलग होकर विद्रोह किया, ठाकरे ने उन्हें वापस लाने के लिए प्रयास किया — लेकिन भाजपा को संगठित रूप से उनका समर्थन न करने की बात कही ।

💼 नीतिगत नैरेटिव

शिंदे का कहना है कि अब ठाकरे “लोकल हितों व चुनावी रणनीति के लिए मराठी आग्रह” कर रहे हैं—लेकिन यह एक सोचते हुए कदम नहीं, बल्कि चुनाव के लिए बनाई गई रणनीति है।


🏛️ राजनीतिक महौल व प्रभाव

  • यह बयान विधायक परिषद में पेश विचार-विमर्श के दौरान आया, जो पूर्व राजनैतिक गर्मी को और बढ़ा रहा है ।
  • यह स्थिति तब उत्पन्न हुई, जब मुख्यमंत्री फडणवीस ने विधायी परिषद में हास्यपूर्ण रूप में ठाकरे को “सरकारी दल में आने का निमंत्रण” भी दिया था, जिससे राजनीतिक खेल के नए संकेत मिले ।
  • यह समकक्षता बताती है कि महाराष्ट्र में शिवसेना (दोनों पक्षों), भाजपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन, टूट-फूट, और प्रतिद्वंद्विता का महासंग्राम जारी है।

🧭 निष्कर्ष

ईश्वरनाथ शिंदे के आरोपों ने उद्धव ठाकरे पर एक बार फिर राजनीतिक विश्वासघात, आवश्यक अवसरवाद, और भाषा‑संस्कृति के मुद्दों का चुनावी इस्तेमाल करने की छवि थोप दी है। यह स्पष्ट संदेश है कि महाराष्ट्र की राजनीति अब चुनावी गठबंधनों, पुरानी दोस्ती और सामाजिक-सांस्कृतिक दावों के बीच तेज़ गति से आगे बढ़ रही है।