छत्तीसगढ़ के अबुज्जमार जंगल में बड़ी मुठभेड़: 27 माओवादी ढेर, सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी

छत्तीसगढ़ के अबुज्जमार जंगल में बड़ी मुठभेड़: 27 माओवादी ढेर, सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी


छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित अबुज्जमार क्षेत्र में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई, जिसमें कुल 27 माओवादी मारे गए। यह मुठभेड़ राज्य के नारायणपुर जिले के गहन जंगलों में हुई, जिसे नक्सलियों का गढ़ माना जाता है।

कैसे हुआ ऑपरेशन:

सूचना मिली थी कि अबुज्जमार के भीतर बड़ी संख्या में माओवादी कमांडर और उनके दल जंगल में जुटे हैं। इस इनपुट के बाद सीआरपीएफ, डीआरजी और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने 20 मई की रात को ऑपरेशन शुरू किया। मुठभेड़ अगले दिन सुबह तक चली।

सुरक्षा बलों की रणनीति सटीक निकली और घने जंगल में घिरी माओवादी टुकड़ी को चारों ओर से घेर लिया गया। माओवादी फायरिंग करते हुए बच निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन जवाबी कार्रवाई में 27 उग्रवादी मारे गए

बरामदगी और नुकसान:

मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक, वायरलेस सेट और नक्सली साहित्य बरामद किया गया। मारे गए माओवादियों में कई शीर्ष कमांडरों की पहचान हो रही है। हालांकि, कुछ शवों को उनके साथी जंगल में ले गए, जिनकी तलाश जारी है।

ऑपरेशन ‘ब्लैक फॉरेस्ट’ का हिस्सा:

यह मुठभेड़ हाल ही में शुरू हुए ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ का हिस्सा है, जो अप्रैल 2025 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य अबुज्जमार, सुकमा और बीजापुर के घने इलाकों में माओवादियों की गतिविधियों का सफाया करना है।

अब तक इस अभियान में 31 से अधिक माओवादी मारे जा चुके हैं, और दर्जनों गिरफ्तार हुए हैं।

सरकार और पुलिस की प्रतिक्रिया:

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने इस मुठभेड़ को “नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में ऐतिहासिक कदम” बताया और कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था बहाल रखने के लिए इस तरह के ऑपरेशन आगे भी जारी रहेंगे।

डीजीपी अशोक जुनेजा ने कहा:

“हमारे जवानों की बहादुरी और सूझबूझ से यह बड़ी कामयाबी मिली है। यह नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार है।”

स्थानीय लोगों में डर और उम्मीद दोनों:

मुठभेड़ के बाद आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है, लेकिन साथ ही लोग आशा भी जता रहे हैं कि अब क्षेत्र में शांति लौटेगी।


🔎 निष्कर्ष:

छत्तीसगढ़ में यह मुठभेड़ हाल के वर्षों में सबसे बड़ी नक्सली कार्रवाई में गिनी जा रही है। इससे सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ा है, और राज्य सरकार के लिए यह संकेत है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हालात बेहतर दिशा में जा रहे हैं।