जम्मू–कश्मीर में बड़ी आतंकी साजिश का खुलासा

जम्मू–कश्मीर में बड़ी आतंकी साजिश का खुलासा


उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने मुरादाबाद से एक बड़ी आतंकी साजिश का पर्दाफाश करते हुए पाकिस्तानी जासूस ‘शहज़ाद’ (Shehzad Wahab) को गिरफ्तार किया है। उस पर आरोप है कि उसने युवाओं को पाकिस्तान भेजा, उन्हें ISI के लिए जासूसी करने के लिए प्रशिक्षित कराया, और भारत की सुरक्षा संबंधी संवेदनशील जानकारी साझा की।


🔍 कैसे उजागर हुई साजिश?

  • ATS को खुफिया सूचना मिली कि शहज़ाद ने भारतीय सामान — जैसे कपड़े, मसाले, कॉस्मेटिक्स — का कबाड़ उड़ान के बहाने पाकिस्तान में भेजा और उसी कवर से वायरल नेटवर्क संचालित किया।
  • जांच में यह भी पाया गया कि उसने कुछ युवाओं को प्रशिक्षित करवाकर पाकिस्तान भेजा ताकि वे ISI एजेंटों के वाहन बन सकें।
  • शहज़ाद की पीठ में रनापुर, गोरखपुर आदि इलाकों से जुड़ाव था, जहां उसने 20 से अधिक युवाओं को भर्ती का दावा किया।

🛑 कानूनी प्रावधान और हिरासत:

  • शहज़ाद को 19 मई को मुरादाबाद से गिरफ्तार किया गया, और उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत दी गई है।
  • उसके खिलाफ लखनऊ ATS में FIR दर्ज, जिसमें सूचनाएं प्रसारित करना, आतंकवाद और विदेशी जासूसी जैसे अपराध शामिल हैं।

📡 क्या कहता है ATS?

ATS की आधिकारिक जानकारी के अनुसार:

“शहज़ाद ने ISI एजेंटों से सीधा संपर्क रखा और भारत की आंतरिक सुरक्षा संबंधी जानकारी पाकिस्तान भेजी। उसे संदिग्ध ईनपुट्स के आधार पर पकड़ा गया।”


🌐 आतंकी गिरोह से जुड़ाव:

  • शहज़ाद ने केवल जासूसी तक सीमित नहीं किया, बल्कि उसने ISI की मदद से भारत के सीमा पार संस्थानों से फंडिंग की व्यवस्था की।
  • ATS ने इसे पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क का हिस्सा बताते हुए, यूपी में चल रही टीआरएफ-पीएलएफ मॉड्यूल की तलाश तेज कर दी है। इस नेटवर्क को जम्मू–कश्मीर में सक्रिय आतंकी समूहों से जोड़ा जा रहा है।

💥 जम्मू–कश्मीर से क्या होता संबंध?

  • जम्मू–कश्मीर में हाल‑फिलहाल हुई आतंकी घटनाओं में, पाकिस्तान-समर्थित एजेंसियाँ जैसे ISI और उनकी सहयोगी टीआरएफ का दायित्व रहा है। टीआरएफ, जिसका मूल लश्कर-ए-ताइबा से संबंध है, हाल ही में पाहलगाम हमले का जिम्मेदार माना गया।
  • शहज़ाद के गिरफ़्तार होने से यह स्पष्ट हो सकता है कि देश के भीतर ऐसे जासूसी नेटवर्क सक्रिय हैं, जो जम्मू–कश्मीर में चल रही आतंकी गतिविधियों का समर्थन करते हैं। हालिया केस में ATS ने तीन और संदिग्धों की पहचान भी की है, जिन्हें लखनऊ पहुंचाया गया है ताकि उनसे पूछताछ की जा सके।

🧭 सरकारी कार्यवाही और आगे की रणनीति:

  • ATS और ATS कोर्ट मिलकर इस केस को आतंकवादी साजिश के रूप में देख रहे हैं।
  • यह गिरफ्तारी देश की आंतरिक सुरक्षा रणनीतियों में निर्णायक मोड़ बन सकती है।
  • अब केंद्र और राज्य की एजेंसियां कठोर काउंटर जासूसी ऑपरेशन, डेटा ट्रैकिंग, और युवाओं की ट्विटर/सोशल मीडिया मॉनिटरिंग में तेजी ला रही हैं।

निष्कर्ष:

यह गिरफ्तारी शैहज़ाद नामक पाकिस्तानी जासूस की गिरफ्तारी, युवाओं को पाकिस्तान भेजने और ISI के साथ गुप्त सहयोग की हिन्दिष्यगाह है। यह स्पष्ट संकेत देती है कि देश के भीतर ISI नेटवर्क सक्रिय हैं, और ऐसे मामलों में संयुक्त फौज, ATS और खुफिया एजेंसियों का समन्वित कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। अगली सुनाई यूपी ATS कोर्ट में होगी, जिसमें गिरफ्तारियों का दायरा और खुलासे सामने आएंगे।