गढ़चिरौली में नक्सली मुठभेड़: पुलिस ने मार गिराए चार माओवादी, नेटवर्क पर बड़ा वार

गढ़चिरौली में नक्सली मुठभेड़: पुलिस ने मार गिराए चार माओवादी, नेटवर्क पर बड़ा वार


महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित जिले गढ़चिरौली में शुक्रवार को सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई, जिसमें चार माओवादी मारे गए। यह मुठभेड़ गढ़चिरौली के घने जंगलों में उस समय शुरू हुई जब जिला पुलिस और सी-60 कमांडो की संयुक्त टीम गुप्त सूचना के आधार पर तलाशी अभियान चला रही थी।

🪖 घटना का विवरण

पुलिस को खुफिया तंत्र के माध्यम से सूचना मिली थी कि इलाके में कुछ हार्डकोर माओवादी नेताओं की गतिविधि देखी गई है। इसके बाद विशेष अभियान दल ने अहेरी तहसील के जंगलों में अभियान शुरू किया। सुबह करीब 6 बजे के आसपास अचानक माओवादियों ने पुलिस पर गोलीबारी शुरू कर दी। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की और दोनों ओर से करीब 2 घंटे तक गोलीबारी हुई।

☠️ मुठभेड़ में मारे गए चार माओवादी

मुठभेड़ के बाद इलाके की तलाशी ली गई, जहां चार शव बरामद हुए। मारे गए माओवादियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है, लेकिन प्रारंभिक जांच में पता चला है कि वे सभी स्थानीय कमांडर स्तर के थे और कई मामलों में वांछित थे। उनके पास से एके-47 राइफल, देसी बंदूकें, ग्रेनेड और भारी मात्रा में नक्सली साहित्य बरामद किया गया है।

🛡️ पुलिस का बयान

गढ़चिरौली पुलिस अधीक्षक नीलोत्पल ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया:

“यह ऑपरेशन माओवादियों की गतिविधियों पर बड़ा प्रहार है। हमारे जवानों की सतर्कता और बहादुरी की वजह से यह मुठभेड़ सफल रही। इससे इलाके में माओवादियों की ताकत कमजोर होगी।”

⚠️ इलाके में हाई अलर्ट

मुठभेड़ के बाद पूरे इलाके को सील कर दिया गया है और अन्य माओवादियों की तलाश में तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है। यह आशंका जताई जा रही है कि कुछ अन्य माओवादी मुठभेड़ के दौरान भागने में सफल रहे हैं।

🧭 पृष्ठभूमि

गढ़चिरौली जिला लंबे समय से नक्सल प्रभावित रहा है, जहां अक्सर माओवादी गतिविधियां देखी जाती हैं। राज्य और केंद्र सरकार की ओर से चलाए जा रहे विकास और नक्सल-विरोधी अभियानों की वजह से हाल के वर्षों में माओवादियों की गतिविधियों में कमी आई है, लेकिन यह घटना दिखाती है कि अभी भी क्षेत्र में खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।


🔚 निष्कर्ष

23 मई की यह मुठभेड़ सुरक्षा बलों के लिए बड़ी कामयाबी है। यह घटना न केवल माओवादियों के लिए बड़ा झटका है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि राज्य सरकार नक्सली हिंसा के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है। गढ़चिरौली जैसे क्षेत्रों में शांति और विकास की प्रक्रिया को तेज करने के लिए ऐसे अभियानों का निरंतर जारी रहना आवश्यक है।