पाकिस्तान एक बार फिर गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। देश में बढ़ती महंगाई, घटते विदेशी मुद्रा भंडार और कर्ज के बढ़ते बोझ के बीच पाकिस्तान सरकार ने विश्व बैंक (World Bank) से 20 अरब अमेरिकी डॉलर की सहायता मांगने की तैयारी कर ली है। यह अनुरोध जून 2025 के पहले सप्ताह में आधिकारिक रूप से किया जाएगा।
💸 आर्थिक हालात बेहद नाजुक
वर्तमान में पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार घटकर सिर्फ 3.2 अरब डॉलर के करीब रह गया है, जो कि आयात खर्च के लिए बेहद अपर्याप्त है। इसके अलावा, पाकिस्तानी रुपये में लगातार गिरावट और ऊर्जा आयात बिल के बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।
पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार:
“हमारी प्राथमिकता है कि जून के अंत तक देश को डिफॉल्ट की स्थिति से बचाया जाए। वर्ल्ड बैंक से 20 अरब डॉलर की मांग इसलिए की जा रही है ताकि अंतरराष्ट्रीय कर्ज चुकाने और जरूरी वस्तुओं के आयात को जारी रखा जा सके।”
🧾 IMF के साथ भी जारी है बातचीत
हाल ही में पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से भी 6 अरब डॉलर के राहत पैकेज की मांग की थी। हालांकि IMF ने कड़ी शर्तों के तहत ही मदद देने की बात कही है, जिनमें टैक्स सुधार, सब्सिडी खत्म करना और ऊर्जा क्षेत्र में निजीकरण प्रमुख हैं।
📊 बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी
देश में मुद्रास्फीति की दर 28% से ऊपर पहुंच चुकी है। पेट्रोल, डीजल, गैस और खाद्य वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। आम जनता पर इस आर्थिक संकट का सीधा असर पड़ रहा है।
बेरोजगारी दर भी 12% से अधिक हो गई है, जिससे युवा वर्ग में असंतोष तेजी से फैल रहा है।
🏛️ राजनीतिक अस्थिरता बनी बड़ी चुनौती
देश की राजनीतिक स्थिति भी बेहद अस्थिर है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार पर विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि उसने देश की आर्थिक दिशा पर नियंत्रण खो दिया है। बढ़ती अस्थिरता के कारण विदेशी निवेशकों का विश्वास भी डगमगा गया है।
🌍 अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अमेरिका, चीन और खाड़ी देशों से पाकिस्तान को अभी तक कोई स्पष्ट वित्तीय सहायता नहीं मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वर्ल्ड बैंक और IMF ने जल्द राहत नहीं दी, तो पाकिस्तान को ‘आर्थिक आपातकाल’ घोषित करना पड़ सकता है।
📌 निष्कर्ष
पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक स्थिति उसकी संप्रभुता के लिए भी खतरा बन सकती है।
वर्ल्ड बैंक से 20 अरब डॉलर की मांग देश को दिवालियापन से बचाने की आखिरी कोशिश मानी जा रही है।
अब देखना यह होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं पाकिस्तान की मदद को तैयार होती हैं या नहीं।

