उत्तर प्रदेश सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण को नया निर्देशक महानिदीक्षक (DGP) नियुक्त किया है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है और वे पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार की जगह ले रहे हैं, जिन्होंने उसी दिन रिटायरमेंट ली।
📌 मुख्य जानकारी
- राजीव कृष्ण, 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी, वर्तमान में DG Vigilance और UP Police Recruitment and Promotion Board (UPPRPB) के पद पर तैनात थे।
- यूपी पुलिस में उनका कार्यकाल 1 जून 2025 से प्रभावी माना जा रहा है, क्योंकि वे 31 मई 2025 से ही पद ग्रहण कर चुके हैं। हालांकि, वे फिलहाल “अधिकारवाहक (acting) डीजीपी” का पद धारण कर रहे हैं।
- पिछले तीन वर्षों में वे पांचवें लगातार अध acting DGP बने हैं — DS Chauhan, RK Vishwakarma, Vijay Kumar, Prashant Kumar के बाद।
👤 राजीव कृष्ण — पृष्ठभूमि एवं अनुभव
- शैक्षणिक योग्यता: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में स्नातक।
- प्रारंभिक करियर: Bareilly, Kanpur, Aligarh में ASP के रूप में शुरू, बाद में SSP/SSP पदों पर Agra, Lucknow, Noida सहित कई जिलों में उत्तरदायी।
- मुख्य उपलब्धियाँ:
- यूपी Anti‑Terror Squad (ATS) के संस्थापक प्रमुख बने — आतंकवाद विरोधी अभियानों में हिस्सा लिया।
- भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) में IG Operations के रूप में सीमा क्षेत्रों की जिम्मेदारी निभाई।
- Agra SSP रहते हुए किडनैपिंग गैंगों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की।
- भव्य पारिवारिक पृष्ठभूमि: वे एक पारंपरिक सार्वजनिक सेवा परिवार से आते हैं जिसमें ब्यूरोक्रेट, पुलिस अधिकारी, कानूनी क्षेत्र एवं राजनीतिक व्यक्ति शामिल हैं। उनकी पत्नी IRS अधिकारी हैं।
🔧 कार्य नीति और चुनौतियाँ
- पुलिस भर्ती प्रक्रिया: वे UPPRPB अध्यक्ष के रूप में भारत की सबसे बड़ी पुलिस भर्ती (60,244 कांस्टेबल) के सफल आयोजन के लिए वे प्रशंसा के पात्र रहे, खासकर परीक्षा पेपर लीक के बाद होने वाली मांगों के बीच।
- योग्यता एवं पारदर्शिता: उनकी नियुक्ति में 11 वरिष्ठ अधिकारियों को पीछे छोड़ा गया, इससे संकेत मिलता है कि योग्यता-आधारित नियुक्ति को प्राथमिकता दी गई है। वे निहायत प्रभावी और साफ-सुथरी छवि के अधिकारी माने जाते हैं।
⚠️ राजनीतिक आलोचनाएँ
- समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है कि लगातार अध acting DGP की नियुक्ति करके वे UPSC प्रक्रिया एवं सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं।
- उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में डीजीपी का स्थायी नियुक्ति न होना राजनीतिक हस्तक्षेप एवं संसदीय मानदंडों की अवहेलना का प्रतीक है।
📋 सारांश तालिका
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| नियुक्ति तिथि | 31 मई 2025 (अधिकारिक रूप से acting DGP) |
| बैच एवं कैडर | 1991‑बैच, उत्तर प्रदेश आईपीएस कैडर |
| पूर्व पद | DG Vigilance, UPPRPB अध्यक्ष |
| प्रमुख उपलब्धियाँ | ATS संस्थापक, BSF IG, सफल भर्ती अभियान |
| कार्यकाल | जून 2029 तक सेवा में रहने की संभावना |
| आलोचना | अध acting DGP पद्धति और UPSC प्रक्रिया की अनदेखी |
राजीव कृष्ण की यह नियुक्ति उत्तर प्रदेश में पुलिस व्यवस्था में एक नई सोच और आधुनिक दिशा की शुरुआत प्रतीत होती है। उनकी तकनीकी दक्षता, फील्ड अनुभव और पारदर्शी कार्यशैली पुलिस प्रशासन में सुशासन एवं जवाबदेही स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

