उत्तर प्रदेश के 63% जिलों में बारिश सामान्य से कम — मॉनसून का असंतुलित स्वरूप

उत्तर प्रदेश के 63% जिलों में बारिश सामान्य से कम — मॉनसून का असंतुलित स्वरूप


लखनऊ, 1 जून 2025 — मानसून के पहले दो महीनों (जून व जुलाई) में उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से लगभग 47 ज़िले (63%) में बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई है, जबकि कुछ जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। यह जानकारी हाल ही में प्रकाशित IMD डेटा द्वारा प्रदान की गई है ।


📉 बारिश का वितरण: क्षेत्रीय असंतुलन

  • पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्थिति विशेष रूप से गंभीर रही — यहाँ 42 जिलों में से 34 जिलों (81%) में बारिश नार्मल से कम दर्ज की गई है।
  • पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 33 जिलों में से 13 जिलों ने ही वर्षामान से कम बारिश प्राप्त की ।

✅ कुछ जिलों में बारिश सामान्य या अधिक

निम्नलिखित जिलों ने मॉनसून के इस दौरान सामान्य से अधिक बारिश प्राप्त की:

  • महोबा: 143%
  • ललितपुर: 125%
  • बांदा: 111%
  • हमीरपुर: 108%
  • एटह: 94%

📌 सबसे अधिक बारिश की कमी वाले जिले

कुछ जिलों में बारिश सामान्य से बहुत नीचे रही:

  • देवरिया: 91% की कमी
  • गौतमबुद्धनगर: 73%
  • कुशीनगर: 69%
  • पिलीभीत: 68%
  • शामली और संत कबीर नगर: 64% की कमी

🌡️ संक्षिप्त मौसम सारांश

  • प्रदेश की कुल बारिश इस अवधि में लगभग 6% कम रही।
  • लखनऊ में 26% तक कमी दर्ज की गई — यहाँ अब तक केवल 234.9 मिमी की बारिश हुई, जबकि औसत 317.3 मिमी होना चाहिए था।

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⚠️ किसानों एवं प्रशासन हेतु प्रभाव

  1. कृषि उत्पादन में जोखिम:
    पूर्वी यूपी के जिलों में निर्जलीकरण और सिंचाई की कमी के चलते आम तौर पर खरीफ फसलों (चावल, मक्का, दलहन) की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है।
  2. मुख्यमंत्री की समीक्षा और तैयारी:
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल में पूर्वी हिस्सों में बनी स्थिति की समीक्षा की, और प्रभावित जिलों में आपूर्ति और सिंचाई तैयारियों को प्राथमिकता दी गई — इरिगेशन योजनाएं पूरी गति से चल रही हैं, और राहत टीमें सतर्क हैं ।
  3. आगामी संभावनाएँ:
    IMD की भविष्यवाणी के अनुसार अगस्त व सितंबर में बारिश सामान्य अथवा अधिक होने की संभावना है — जिससे मौजूदा घाटा कुछ हद तक पूरा हो सकता है ।

🌐 व्यापक पृष्ठभूमि और विश्लेषण

  • पूरे देश में जून-जुलाई अवधि में बारिश 9% अधिक रही — लेकिन कुछ राज्य, खासकर उत्तर-पूर्व और बिहार, में भारी कमी दर्ज की गई ([ financiar express ]) ।
  • UP में पश्चिमी हिस्सों में बारिश अपेक्षाकृत बेहतर रही, जबकि पूर्व व मरुभूमि जैसे बुंदेलखंड क्षेत्र क्रमशः सूखे की ओर अग्रसर हैं। यह राज्य की सिंचाई योजनाओं और जल प्रबंधन नीतियों के लिए संकेत है ।

📝 निष्कर्ष

1 जून 2025 तक मॉनसून की शुरुआत में उत्तर प्रदेश में असमान बारिश की तस्वीर सामने आई है: जहाँ अधिकांश जिलों में बारिश कमी दर्ज हुई, वहीं कुछ जिलों में बढ़त भी रही। विशेष रूप से पूर्वी यूपी में चिंतनीय कमी रही है, और कुछ जिलों में बारिश सामान्य से अधिक होने से जलभराव-प्रबंधन एवं बाढ़ संभावनाओं जैसे जोखिम भी बढ़े हैं। किसान, कृषि अधिकारी और राज्य प्रशासन इस मौसम के रुझान को ध्यान में रखते हुए सिंचाई, फसल संरक्षण और आपदा-प्रबंधन तैयारियों में बदलाव कर रहे हैं।