सिक्किम भूस्खलन: लाचेन के चाटन क्षेत्र में तबाही, सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

सिक्किम भूस्खलन: लाचेन के चाटन क्षेत्र में तबाही, सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी


उत्तर-पूर्वी भारत के पहाड़ी राज्य सिक्किम में सोमवार सुबह लाचेन जिले के चाटन इलाके में एक बड़े भूस्खलन की खबर से हड़कंप मच गया। यह क्षेत्र चीन सीमा के पास स्थित है और सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। इस आपदा में भारतीय सेना के कई जवानों के दबे होने की आशंका है। सेना और स्थानीय प्रशासन की टीमें युद्धस्तर पर बचाव अभियान चला रही हैं।

क्या हुआ था?

सुबह करीब 5:45 बजे अचानक भारी बारिश के बाद चाटन इलाके की एक पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा। इसी क्षेत्र में सेना की एक अस्थायी चौकी और कुछ रसद वाहन भी मौजूद थे, जो मलबे में दब गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि ज़ोरदार आवाज़ के साथ जब पहाड़ टूटा, तो पूरे इलाके में धूल और मलबे का गुबार छा गया।

सेना की तत्परता और रेस्क्यू अभियान

जैसे ही हादसे की सूचना मिली, सेना की इंजीनियरिंग टीम और डिजास्टर रेस्पॉन्स यूनिट (DRU) तत्काल मौके पर पहुंची। एनडीआरएफ और ITBP की मदद से जेसीबी, ड्रोन और सर्च डॉग्स का सहारा लेकर राहत कार्य जारी है। हेलीकॉप्टर के ज़रिए ऊपर से भी निगरानी की जा रही है।

सेना की ओर से जारी बयान के अनुसार:

“रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। अभी तक तीन जवानों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है, लेकिन चार जवान अब भी मलबे के नीचे फंसे हुए हैं। उनकी लोकेशन का पता लगाया जा चुका है और राहतकर्मी उन्हें बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं।”

भूगर्भ वैज्ञानिकों की राय

स्थानीय भूगर्भ विशेषज्ञों का मानना है कि यह भूस्खलन हाल के दिनों में हो रही लगातार बारिश और भूकंपीय गतिविधियों के चलते हुआ है। सिक्किम जैसे पहाड़ी राज्य में मानसून के दौरान ऐसे खतरे बढ़ जाते हैं।

सुरक्षा के लिहाज़ से चिंता

लाचेन क्षेत्र की यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र चीन की सीमा से केवल कुछ किलोमीटर की दूरी पर है। यहां पर सेना की सक्रियता हमेशा बनी रहती है और किसी भी तरह की प्राकृतिक आपदा से न केवल मानवीय क्षति होती है, बल्कि सामरिक व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ता है।

प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताया और ट्वीट करते हुए कहा:

“सिक्किम में हुए भूस्खलन की घटना दुखद है। हमारे जवानों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करता हूं। राहत कार्य में लगे सभी लोगों का आभार।”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी स्थिति की समीक्षा की और सेना को हरसंभव सहायता देने का निर्देश दिया।

स्थानीय प्रशासन की भूमिका

सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने आसपास के गांवों को अलर्ट पर रखा है और पहाड़ी मार्गों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। चाटन और आसपास के क्षेत्रों में बिजली और मोबाइल नेटवर्क बाधित हुआ है, जिसे बहाल करने के प्रयास हो रहे हैं।


निष्कर्ष

सिक्किम का यह भूस्खलन केवल एक स्थानीय आपदा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी है। मौसम विभाग ने आगामी 48 घंटों में और बारिश की चेतावनी दी है, जिससे राहत कार्य में बाधा आ सकती है। फिलहाल पूरा देश जवानों की सलामती के लिए प्रार्थना कर रहा है।