रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडल ने तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में अपनी दूसरी सीधे वार्ता की शाम एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगे की रणनीति का विवरण साझा किया। यह वार्ता मार्च 2022 के बाद पहली बार दोनों पक्षों के बीच हुई थी जिसमें सीमा विवाद और युद्धविराम पर कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
🔎 वार्ता का सारांश और प्रमुख निष्कर्ष
- बैठक केवल एक घंटे से भी कम समय चली, और दोनों पक्षों के बीच मुख्यतः एहतियातपूर्वक मानवीय उपाय पर सहमति बनी — जैसे कि गंभीर रूप से घायल और युवा कैदियों का आदान‑प्रदान और मृत सैनिकों की 12,000 शरीरों की वापसी। लेकिन किसी सर्वत: युद्धविराम (full ceasefire) पर कोई सहमति नहीं बन सकी।
- रूस ने यूक्रेन को शर्तों के रूप में कुछ क्षेत्रों में वापस लेने, सैनिक तालिका में कड़े प्रतिबंध स्वीकार करने, NATO में शामिल न होने तथा रूसी को आधिकारिक भाषा मान्यता देने जैसी मांगें रखीं। यूक्रेन ने इन मांगों को अस्वीकार किया।
🗣️ यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रमुख बिंदु
- रस्टेम उमरोव, जो यूक्रेन की टीम के नेतृत्व कर रहे हैं, ने बताया कि दोनों पक्षों ने मृत सैनिकों और कैदियों के आदान‑प्रदान पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने क्या कहा: “हमने गंभीर रूप से घायल और युवा कैदियों के आदान‑प्रदान की सहमति दी है। मृत सैनिकों की वापसी भी सुनिश्चित हुई है।”
- उमरोव ने कहा कि यूक्रेन ने रूस से एक शांति संबंधी मैमोरेंडम प्राप्त किया है, जिसे एक सप्ताह में समीक्षा की जाएगी, और इस आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
- उन्होंने यह भी ज़ोर दिया कि रूस की हालिया ड्रोन हमलों और युद्ध रणनीतियों पर ध्यान देना आवश्यक है, और अगर रूस आक्रामकता जारी रखता है, तो यूक्रेन भी जवाबी कार्रवाई जारी रखेगा।
🌐 अंतरराष्ट्रीय संदर्भ
- तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगन ने सुझाव दिया है कि अगर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीीर पुतिन इस्तांबुल या अंकारा में वार्ता के लिए आएँ, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी शामिल हो सकते हैं, जिससे एक उच्च‑स्तरीय शिखर सम्मेलन संभव होगा।
- विद्यमान तनाव और बातचीत में रोडमैप की कमी के कारण अमेरिका तथा यूरोपीय देशों की नाराजगी बनी हुई है। उन्हें उम्मीद है कि रूस वार्ता में अधिक रचनात्मक भूमिका निभाएगा।
❗ निष्कर्ष
- वार्ता सीमित सुरक्षा और मानवीय पहलुओं (कैदी और मृतकों का आदान‑प्रदान) तक सीमित रही, लेकिन सर्वजन-युद्धविराम पर कोई प्रगति नहीं हुई।
- रूस की मांगें अत्यधिक कट्टरपंथी और आनुपातिक नहीं दिखाई देतीं — इन्हें यूक्रेन ने झटका बताया है।
- यूक्रेन ने भविष्य की वार्ता की समय‑सीमा (20–30 जून) प्रस्तावित की हैं, वहीं एक संभावित शिखर सम्मेलन में ट्रम्प और एर्दोगन की भी भागीदारी हो सकती है।

