दिल्ली में दरिंदगी: 9 वर्षीय बच्ची का खून से लथपथ शव सूटकेस में बरामद

दिल्ली में दरिंदगी: 9 वर्षीय बच्ची का खून से लथपथ शव सूटकेस में बरामद


  • मामला अचानक उजागर हुआ: 9 वर्षीय बच्ची, जो Nehru Vihar की निवासी थी, शाम लगभग 7 बजे बड़ी अम्मी को बर्फ देने गई थी, लेकिन दो घंटे से अधिक समय तक घर नहीं लौटी। परिवार ने तलाशी शुरू की, जिसके बाद उसे किसी ने पास के एक फ्लैट की ओर जाते देखा था।
  • श्रद्धानुसार खोज-बीन: बच्ची के पिता जब फ्लैट पर पहुँचे, तो गेट बाहर से बंद था। उन्होंने ताला तोड़ा और अंदर देखा तो बच्ची खून से लथपथ एक सूटकेस में पड़ी थी। उन्होंने उसे तुरंत नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

शुरुआती जांच एवं घटनास्थल की कार्रवाई

  • पीसीआर कॉल और पुलिस पहुंच: रात 8:41 पर Dayalpur पुलिस स्टेशन को PCR कॉल मिली। पुलिस टीम घटनास्थल—गली नं. 2, Nehru Vihar पर पहुँची, लेकिन बच्ची पहले ही Jag Pravesh Chandra अस्पताल ले जाई जा चुकी थी।
  • प्राथमिक चिकित्सा संकेत: डॉक्टर्स ने चेहरे पर चोट के निशान और खून भरी सूटकेस के मद्देनज़र यौन उत्पीड़न की आशंका जताई।
  • एल्गुलर जांच: पुलिस सूत्रों का कहना है कि सभी पहलुओं—दुष्कर्म, हत्या—की गहन जांच की जा रही है। जगह पर Crime Scene और FSL (Forensic Science Laboratory) टीमों को बुलाया गया है और शव को मोर्चरी में सुरक्षित रखा गया है।

आरोप, जांच-संरचना और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया

  • कानूनी कार्रवाई: मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की प्रासंगिक धाराओं और POCSO एक्ट की धारा 6 के तहत FIR दर्ज कर छह टीमें गठित की गईं हैं, जो आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी के लिए काम कर रही हैं।
  • लोकल आक्रोश: घटना के बाद इलाके में भारी गुस्सा देखने को मिला; स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए और आरोपियों की त्वरित गिरफ्तारी की मांग की। तनाव के मद्देनज़र पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया।
  • आरोपी की तलाश: पुलिस ने प्रारंभिक छापे NCR, हापुड़ सहित आसपास के क्षेत्रों में मारे हैं। आरोप है कि आरोपी अक्सर राज्य सीमा पार घूमता था—शायद रोजगार या व्यक्तिगत संबंधों के कारण। इससे मल्टी-स्टेट जांच की जरूरत पड़ी है

निष्कर्ष

यह शर्मिंदगी से भरी घटना न केवल एक नर्सरी की छात्रा के साथ हुई अमानवीय कृत्य की गवाही देती है, बल्कि यह बच्चा सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े करती है। पीड़ित का परिवार न्याय चाहता है और दिल्ली पुलिस व प्रशासन पर दबाव है कि ऐसा जघन्य अपराध बगैर परिणाम के न टले। मामले की निगरानी अब उच्च स्तरीय होती जा रही है।