टीप्रा मोथा विधायक की विवादित मांग
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टीप्रा मोथा विधायक की मांग


“त्रिपुरा की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। टीप्रा मोथा पार्टी (Tipra Motha) के विधायक रंजीत देबबर्मा ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) से मांग की है कि जो आदिवासी महिलाएं गैर-जनजातियों से शादी करती हैं, उनके विशेष लाभ और सुविधाएं खत्म कर दी जाएं।”

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2018 में भी उठी थी ऐसी मांग यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की मांग सामने आई हो। वर्ष 2018 में इंडिजिनस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT) – टिप्राहा गुट ने भी ऐसी ही मांग की थी। उस समय उन्होंने प्रस्ताव रखा था कि अगर कोई आदिवासी महिला गैर-जनजाति व्यक्ति से शादी करती है, तो उसका एसटी (ST) दर्जा खत्म कर दिया जाए।


विधायक का तर्क रंजीत देबबर्मा का कहना है कि आदिवासी महिलाओं को मिलने वाले विशेष लाभ केवल उनकी समुदायिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए दिए गए हैं। लेकिन अगर वे गैर-जनजातियों से विवाह करती हैं, तो यह पहचान कमजोर पड़ जाती है। ऐसे में उन्हें एसटी श्रेणी में दिए जाने वाले फायदे का लाभ नहीं मिलना चाहिए।


संभावित प्रभाव अगर आदिवासी महिलाओं के विशेष लाभ पर रोक लगाने का यह प्रस्ताव लागू होता है, तो इससे कई सामाजिक और राजनीतिक विवाद खड़े हो सकते हैं।

  • महिलाओं के अधिकारों पर सीधा असर पड़ेगा।
  • समाज में असमानता और वैचारिक मतभेद बढ़ सकते हैं।
  • राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

विशेषज्ञों की राय कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का कदम संविधान के अनुच्छेद 15 और 21 का उल्लंघन हो सकता है, क्योंकि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और समानता के अधिकार से जुड़ा हुआ है। वहीं, समाजशास्त्रियों का कहना है कि ऐसी नीतियां महिलाओं को दोहरे दबाव में डाल सकती हैं।


राजनीतिक हलचल इस बयान के बाद त्रिपुरा की राजनीति में हलचल मच गई है। विपक्षी दलों ने इसे महिलाओं के खिलाफ कदम बताया है और कहा है कि यह सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है। वहीं, टीप्रा मोथा पार्टी के समर्थक इसे आदिवासी पहचान बचाने की दिशा में जरूरी कदम बता रहे हैं।