Education is a Right, Not a Commodity: केरल से क्या सीख सकता है पश्चिम बंगाल

Education is a Right, Not a Commodity: केरल से क्या सीख सकता है पश्चिम बंगाल


Sneha Kashyap | Akhbaar Ekta

Education is a Right Not a Commodity—यह केवल नारा नहीं, बल्कि एक नीतिगत सोच है, जिसे Kerala ने दशकों से अपनाया है। केरल की शिक्षा व्यवस्था इस बात का उदाहरण है कि जब शिक्षा को बाज़ार की वस्तु नहीं, बल्कि नागरिक का अधिकार माना जाता है, तो समाज कैसे आगे बढ़ता है।केरल में सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में निवेश, प्रशिक्षित शिक्षक, और समान अवसरों ने उच्च साक्षरता दर को संभव बनाया है। यहां शिक्षा का निजीकरण सीमित है, जिससे आर्थिक स्थिति किसी बच्चे की पढ़ाई में बाधा नहीं बनती। इसके विपरीत, West Bengal में हाल के वर्षों में शिक्षा का बढ़ता व्यावसायीकरण चिंता का विषय बन गया है। महंगे निजी स्कूल और कोचिंग संस्थान शिक्षा को “सेवा” से ज़्यादा “उत्पाद” बना रहे हैं।यदि पश्चिम बंगाल, केरल मॉडल से प्रेरणा ले, तो सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारी जा सकती है, शिक्षक भर्ती पारदर्शी हो सकती है और शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित की जा सकती है। Education is a Right Not a Commodity का सिद्धांत सामाजिक समानता और दीर्घकालिक विकास की नींव रखता है।शिक्षा में निवेश किसी खर्च की तरह नहीं, बल्कि भविष्य में किया गया सबसे मजबूत निवेश है—और यही केरल का सबसे बड़ा सबक है।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1. Education is a Right Not a Commodity का क्या मतलब है? इसका अर्थ है कि शिक्षा हर नागरिक का अधिकार है, न कि केवल पैसा देने वालों की सुविधा।

Q2. केरल का शिक्षा मॉडल सफल क्यों है? मजबूत सरकारी स्कूल, प्रशिक्षित शिक्षक और समान अवसर इसकी मुख्य वजह हैं।

Q3. क्या पश्चिम बंगाल केरल मॉडल अपना सकता है? हां, सही नीतियों और निवेश से यह पूरी तरह संभव है।