भारत की मुद्रा बाजार में मंगलवार को सकारात्मक रुख देखने को मिला। रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ खुला और शुरुआती कारोबार में तेज बढ़त दर्ज की। भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, जिसका सीधा असर रुपये पर पड़ा।
हाल ही में घोषित ट्रेड समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगने वाले टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इससे भारतीय निर्यातकों को राहत मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा स्थिति बेहतर हुई है। यही कारण है कि रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूती दिखा रहा है।
इंटरबैंक फॉरेक्स बाजार में रुपये की मांग बढ़ी है।
विदेशी निवेशकों की संभावित वापसी को भी इसका बड़ा कारण माना जा रहा है। लंबे समय से बिकवाली कर रहे FIIs अब भारतीय बाजार में दोबारा दिलचस्पी दिखा सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो रुपये को और समर्थन मिल सकता है।
इसके अलावा, डॉलर इंडेक्स में आई हल्की कमजोरी ने भी रुपये को सहारा दिया है। जब वैश्विक स्तर पर डॉलर कमजोर होता है, तो उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं मजबूत होती हैं। मौजूदा हालात में रुपया डॉलर के मुकाबले स्थिर और सकारात्मक ट्रेंड में नजर आ रहा है।
हालांकि, बाजार की नजर RBI की रणनीति पर बनी हुई है। केंद्रीय बैंक जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप कर सकता है ताकि अत्यधिक उतार-चढ़ाव से बचा जा सके।
FAQs (Hindi)
Q1. रुपया डॉलर के मुकाबले क्यों मजबूत हुआ है?
भारत-अमेरिका ट्रेड डील और टैरिफ कटौती से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
Q2. क्या इससे आम लोगों पर असर पड़ेगा?
हां, मजबूत रुपया आयात को सस्ता कर सकता है, जिससे महंगाई पर दबाव कम हो सकता है।
Q3. क्या यह मजबूती लंबे समय तक रह सकती है?
यह RBI नीति, विदेशी निवेश और वैश्विक बाजार पर निर्भर करेगा।

