भारत में जूट लाइफस्टाइल उत्पाद तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण उपभोक्ता अब टिकाऊ और प्राकृतिक विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। जूट इसी जरूरत को पूरा करता है।
यह न केवल बायोडिग्रेडेबल है, बल्कि रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करता है।
सरकार राष्ट्रीय जूट विकास कार्यक्रम के तहत जूट लाइफस्टाइल उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है।
इन योजनाओं में जूट विविधिकरण, बाजार विकास और प्रमोशन स्कीम प्रमुख हैं। इनके जरिए कारीगरों और निर्माताओं को तकनीकी सहायता, सब्सिडी और बाजार से जोड़ने का काम किया जा रहा है।
जूट उद्योग की सबसे बड़ी ताकत इसका टिकाऊ स्वरूप है। बैग, होम डेकोर, फर्निशिंग, फुटवियर और गिफ्ट आइटम जैसे जूट लाइफस्टाइल उत्पाद अब शहरी बाजारों में भी जगह बना रहे हैं। इससे छोटे उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को सीधा लाभ मिल रहा है।
सरकार जूट पैकेजिंग सामग्री अधिनियम और न्यूनतम समर्थन मूल्य के जरिए किसानों को भी सुरक्षा प्रदान कर रही है। इससे कच्चे जूट की उपलब्धता बनी रहती है और उत्पादन श्रृंखला मजबूत होती है।
FAQs (Hindi)
Q1. जूट लाइफस्टाइल उत्पाद क्या होते हैं?
जूट से बने बैग, होम डेकोर, फर्नीचर और फैशन आइटम जूट लाइफस्टाइल उत्पाद कहलाते हैं।
Q2. जूट उत्पाद पर्यावरण के लिए क्यों बेहतर हैं?
जूट बायोडिग्रेडेबल और प्राकृतिक फाइबर है, जिससे प्रदूषण कम होता है।
Q3. सरकार जूट उद्योग को कैसे समर्थन दे रही है?
सरकार सब्सिडी, एमएसपी, प्रमोशन स्कीम और अनिवार्य पैकेजिंग नियमों के जरिए समर्थन दे रही है।

