चीन न्यूक्लियर टेस्ट दावा 2020 से जुड़ा प्रतीकात्मक दृश्य, गलवान घाटी तनाव और परमाणु निगरानी का संकेत
गलवान झड़प के बाद चीन पर गुप्त परमाणु परीक्षण का अमेरिकी दावा | Akhbaar Ekta

चीन न्यूक्लियर टेस्ट दावा: गलवान झड़प के बाद अमेरिका ने क्यों उठाए सवाल


साल 2020 की गलवान झड़प के बाद सामने आया चीन न्यूक्लियर टेस्ट दावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि चीन ने गलवान घाटी में तनाव के कुछ ही दिनों बाद गुप्त परमाणु परीक्षण किए थे। इस दावे ने न केवल भारत-चीन संबंधों बल्कि वैश्विक परमाणु निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।


अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, चीन ने जून 2020 में एक ऐसा परमाणु परीक्षण किया, जिसे भूकंपीय निगरानी से छिपाने की कोशिश की गई। दावा है कि इसके लिए “डीकपलिंग” तकनीक का उपयोग हुआ, जिससे विस्फोट के झटके सामान्य सेंसर में कम दर्ज होते हैं। यदि चीन न्यूक्लियर टेस्ट दावा सही साबित होता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय परमाणु नियमों की गंभीर अवहेलना मानी जाएगी।


गलवान झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हुए थे। इसके बाद सीमा पर सैन्य तनाव बढ़ा और कई दौर की कूटनीतिक बातचीत हुई। ऐसे समय में परमाणु परीक्षण का आरोप स्थिति को और संवेदनशील बना देता है। भारत जैसे देशों के लिए यह दावा रणनीतिक दृष्टि से अहम है, क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा सीधे इससे जुड़ी है।


हालांकि चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। बीजिंग का कहना है कि वह किसी भी गुप्त परमाणु परीक्षण में शामिल नहीं है। बावजूद इसके, चीन न्यूक्लियर टेस्ट दावा ने वैश्विक मंच पर पारदर्शिता और भरोसे की कमी को उजागर किया है।


Nandita Sinha | Akhbaar Ekta

FAQ (Hindi)


Q1. चीन न्यूक्लियर टेस्ट दावा क्या है?


अमेरिका का आरोप है कि चीन ने 2020 में गलवान झड़प के बाद गुप्त परमाणु परीक्षण किए।


Q2. यह दावा क्यों अहम है?


यह अंतरराष्ट्रीय परमाणु संधियों और वैश्विक सुरक्षा से जुड़ा मामला है।


Q3. चीन की प्रतिक्रिया क्या है?


चीन ने सभी आरोपों को खारिज किया है और उन्हें बेबुनियाद बताया है।