मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। मिडिल ईस्ट तेल संकट के बीच ईरान ने अपनी रणनीति से बड़ा आर्थिक फायदा उठाया है। जहां अन्य खाड़ी देश उत्पादन और सप्लाई में गिरावट झेल रहे हैं, वहीं ईरान लगातार तेल निर्यात बनाए रखने में सफल रहा है।
खार्ग टर्मिनल से ईरान की सप्लाई अभी भी जारी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, देश रोजाना 17 से 20 लाख बैरल तेल एक्सपोर्ट कर रहा है। इसके अलावा, होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण ने ईरान को अतिरिक्त ताकत दी है। जहाजों से वसूला जा रहा ‘वॉर टैक्स’ उसकी कमाई को और बढ़ा रहा है।
दूसरी तरफ, सऊदी अरब, कतर और इराक जैसे देशों का उत्पादन 70% तक गिर गया है। सुरक्षा जोखिम, बीमा लागत और लॉजिस्टिक्स समस्याओं ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। यही कारण है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. मिडिल ईस्ट तेल संकट क्या है?
मिडिल ईस्ट तेल संकट वह स्थिति है, जब युद्ध या तनाव के कारण तेल उत्पादन और सप्लाई प्रभावित होती है।
Q2. ईरान को इस संकट से कैसे फायदा हुआ?
ईरान ने अपने तेल निर्यात को जारी रखा और होर्मुज स्ट्रेट से अतिरिक्त टैक्स वसूला।
Q3. भारत पर इसका क्या असर पड़ेगा?
भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है और महंगाई बढ़ सकती है।

