ओडिशा में पाकिस्तान जासूसी नेटवर्क से जुड़े एक गंभीर मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। भुवनेश्वर की एसडीजेएम कोर्ट ने सात आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन साल की कठोर सजा सुनाई। इसके साथ ही प्रत्येक पर 32,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
जांच में सामने आया कि आरोपी भारतीय सिम कार्ड का गलत इस्तेमाल कर ओटीपी विदेशी एजेंटों को भेज रहे थे। इससे संदिग्ध लोगों को भारत के डिजिटल नेटवर्क तक पहुंच मिल रही थी। यह गतिविधि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानी गई।
इस पाकिस्तान जासूसी नेटवर्क का खुलासा स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने किया था। 2023 में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पूरा नेटवर्क सामने आया। जांच के दौरान 56 दस्तावेज और 11 गवाहों के आधार पर आरोप साबित हुए।
अदालत ने साफ कहा कि ऐसे अपराध देश की सुरक्षा से जुड़े होते हैं। इसलिए इसमें सख्त सजा जरूरी है। प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि वे कभी भी अपना ओटीपी किसी के साथ साझा न करें।
FAQ
Q1. पाकिस्तान जासूसी नेटवर्क क्या है?
यह एक ऐसा नेटवर्क है, जिसमें विदेशी एजेंट भारतीय सिम और डेटा का गलत इस्तेमाल करते हैं।
Q2. ओटीपी शेयर करने से क्या खतरा है?
ओटीपी शेयर करने से आपके अकाउंट और डेटा का दुरुपयोग हो सकता है।
Q3. इस केस में कितने लोगों को सजा हुई?
इस मामले में 7 लोगों को दोषी ठहराकर सजा सुनाई गई।

