हिमाचल प्रदेश में इन दिनों हिमाचल नियमितीकरण संकट चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है। राज्य सरकार ने पहले ही घोषणा की थी कि दो वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके अनुबंध कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा। इसके अलावा, चार साल तक काम करने वाले दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी भी इस प्रक्रिया के दायरे में आते हैं।हालांकि, पंचायत और शहरी निकाय चुनावों के चलते लागू आचार संहिता के कारण हिमाचल नियमितीकरण संकट गहराता जा रहा है। अब किसी भी विभाग को कर्मचारियों को नियमित करने से पहले राज्य निर्वाचन आयोग से अनुमति लेनी होगी। यही वजह है कि कई विभागों में प्रक्रिया अधूरी रह गई है।शिक्षा, स्वास्थ्य, जल शक्ति और लोक निर्माण विभाग में सबसे ज्यादा कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं। कई कर्मचारी लंबे समय से स्थायी नौकरी की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।सरकार ने 31 मार्च 2026 तक पात्र कर्मचारियों के लिए अधिसूचना जारी की थी, लेकिन अब आगे की कार्रवाई चुनाव प्रक्रिया पर निर्भर है। विशेषज्ञों का मानना है कि आचार संहिता हटने के बाद हिमाचल नियमितीकरण संकट का समाधान तेजी से हो सकता है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. हिमाचल नियमितीकरण संकट क्या है?
यह वह स्थिति है जिसमें आचार संहिता के कारण कर्मचारियों का नियमितीकरण रुका हुआ है।
Q2. किन कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा?
दो साल पूरे कर चुके अनुबंध और चार साल काम कर चुके दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी पात्र हैं।
Q3. प्रक्रिया क्यों रुकी हुई है?
चुनाव आचार संहिता के कारण विभाग बिना अनुमति आदेश जारी नहीं कर सकते।

