उत्तराखंड में इन दिनों उत्तराखंड फल-सब्जी निगरानी अभियान को तेज कर दिया गया है। बढ़ते कीटनाशक उपयोग की आशंका के बीच खाद्य सुरक्षा विभाग ने सैंपलिंग बढ़ा दी है। बाजार और मंडियों से फल-सब्जियों के नमूने लेकर उनकी जांच कराई जा रही है। इस अभियान का मकसद आम लोगों तक सुरक्षित खाद्य सामग्री पहुंचाना है। प्रशासन अब खेत से लेकर बाजार तक हर स्तर पर नजर रख रहा है। किसानों को वैज्ञानिक तरीके से कीटनाशक उपयोग की सलाह दी जा रही है। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार कई बार खाद्य पदार्थों में तय सीमा से अधिक कीटनाशक पाए गए हैं। इसी कारण उत्तराखंड फल-सब्जी निगरानी को और मजबूत किया गया है। देहरादून में टीमों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और फल मंडियों पर छापेमारी की। जांच के दौरान एक्सपायर उत्पाद और कृत्रिम तरीके से पकाए जा रहे फलों पर विशेष नजर रखी गई।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. उत्तराखंड फल-सब्जी निगरानी अभियान क्यों चलाया जा रहा है?
यह अभियान लोगों को सुरक्षित और शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए चलाया जा रहा है।
Q2. किन चीजों की जांच की जा रही है?
फल, सब्जियां, एक्सपायर उत्पाद और कीटनाशक अवशेष की जांच की जा रही है।
Q3. क्या किसानों को भी इस अभियान में शामिल किया गया है?
हाँ, किसानों को वैज्ञानिक तरीके से कीटनाशक उपयोग की जानकारी दी जा रही है।
Q4. क्या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी जांच के दायरे में हैं?
हाँ, ऑनलाइन किराना प्लेटफॉर्म पर भी छापेमारी और निरीक्षण किया जा रहा है।

