ऑस्ट्रेलिया ने ‘नफरत फैलाने’ के आरोप में इजरायली इन्फ्लुएंसर का वीज़ा किया रद्द

ऑस्ट्रेलिया ने ‘नफरत फैलाने’ के आरोप में इजरायली इन्फ्लुएंसर का वीज़ा किया रद्द


Sneha Kashyap | Akhbaar Ekta

ऑस्ट्रेलिया सरकार ने एक इजरायली सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर का वीज़ा रद्द कर दिया है, जिस पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए नफरत और विभाजनकारी विचार फैलाने का आरोप है। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला देश की सामाजिक सद्भावना, सुरक्षा और बहुसांस्कृतिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन्फ्लुएंसर की सोशल मीडिया गतिविधियों की समीक्षा के दौरान ऐसे कई पोस्ट और वीडियो सामने आए, जिन्हें ऑस्ट्रेलियाई क़ानून और सामुदायिक मानकों के विरुद्ध माना गया। ऑस्ट्रेलिया का इमिग्रेशन क़ानून स्पष्ट करता है कि यदि किसी विदेशी नागरिक की मौजूदगी से सामाजिक तनाव बढ़ने या नफरत फैलने की आशंका हो, तो उसका वीज़ा रद्द किया जा सकता है।Australia के गृह मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाता है, लेकिन नफरत, हिंसा या किसी समुदाय को निशाना बनाने वाली भाषा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। कुछ लोगों ने इसे सख़्त लेकिन ज़रूरी कदम बताया, जबकि कुछ इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला मान रहे हैं।Israel से जुड़े कुछ समर्थकों ने इस निर्णय पर आपत्ति जताई है, वहीं मानवाधिकार समूहों का कहना है कि ऑनलाइन नफरत को रोकने के लिए देशों को ऐसे कदम उठाने ही होंगे। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया प्रभावशाली लोगों की ज़िम्मेदारी कितनी बढ़ गई है।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1. ऑस्ट्रेलिया ने वीज़ा क्यों रद्द किया?

A1. आरोप है कि इन्फ्लुएंसर ने सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाली सामग्री साझा की।

Q2. क्या यह फैसला क़ानूनी है?

A2. हां, ऑस्ट्रेलियाई इमिग्रेशन क़ानून के तहत सरकार को यह अधिकार है

Q3. क्या यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है?

A3. सरकार का कहना है कि नफरत फैलाने वाली भाषा स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आती।