“भाजपा ने तोप‑मिसाइल‑राइफल बनाने का वादा किया, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं”– अखिलेश यादव का आरोप

“भाजपा ने तोप‑मिसाइल‑राइफल बनाने का वादा किया, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं”– अखिलेश यादव का आरोप


समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केन्द्र की नीतियों ने झांसी–बुंदेलखंड में रक्षा उपकरण बनाने का जो वादा किया था, उस पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। उन्होंने भाजपा द्वारा किए गए वादों और वास्तविकता के बीच अंतर उजागर किया।


🎯 मुख्य बिंदु

  • धनात्मक वादों की घोर विफलता:
    अखिलेश यादव ने दावा किया कि भाजपा ने झांसी और बुंदेलखंड क्षेत्र में लड़ाकू विमान, मिसाइल, राइफल और गोला–बारूद बनाने का वादा किया था, लेकिन हकीकत में न तो कोई “सुतली बम” तक नहीं बना, न ही बड़ा रक्षा संयंत्र स्थापित हुआ है ।
  • आयात पर निर्भरता कमजोरी का संकेत:
    उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत आज भी रक्षा उपकरणों के लिए बहुतायत में आयात पर निर्भर है, जबकि भाजपा ने स्वदेशी निर्माण का परोक्ष लक्ष्य रखा था ।
  • किसानों और जमीन अधिग्रहण पर बड़ा हमला:
    अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार किसानों की जमीन अधिग्रहित कर रही है, जिसकी कीमत उन्हें बाजार मूल्य से कम दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों में गहरी नाराज़गी है और सपा सरकार इसे उचित मुआवजा देकर ठीक करने की प्रतिबद्धता रखती है ।
  • युद्ध‑पूर्व तैयारी का संदर्भ:
    एक सवाल पर उन्होंने कहा कि भाजपा की IT और मीडिया टीम ऐसे संकेत दे रही है कि ‘युद्ध पास है’, लेकिन यह सिर्फ प्रोपगैंडा है और वास्तविक तैयारी इस तरह की नहीं है ।

🧩 राजनीतिक संदर्भ

अखिलेश यादव की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश में भारत–पाक तनाव और Operation Abhyaas / Operation Sindoor जैसी सैन्य तैयारियों की खबरें चर्चा में हैं। उन्होंने कहा कि नेता बने “युद्ध‑भूमि”, लेकिन धरातल पर कोई ठोस डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकाई नहीं बनी, जो भाजपा के शंखनाद और वास्तविक कार्यों के अंतर को उजागर करती है।


✍️ निष्कर्ष

अखिलेश यादव का आरोप है कि भाजपा द्वारा किए गए “डिफेंस हार्डवेयर” वादे सिर्फ घोषणा तक सीमित रहे, लेकिन जमीन पर कोई निर्माण या लागत कटौती दिखाई नहीं दी। उन्होंने कहा कि सपा सरकार बनने पर ऐसा निवेशात्मक मॉडल लाएगी, जो किसानों को जमीन मुआवजा देगा और भारी रक्षा आयात पर निर्भरता कम करेगा।