Q1 में केंद्र सरकार का वित्तीय घाटा बढ़कर 17.9% — ₹2.8 लाख करोड़ का रिकॉर्ड

Q1 में केंद्र सरकार का वित्तीय घाटा बढ़कर 17.9% — ₹2.8 लाख करोड़ का रिकॉर्ड


नई दिल्ली, 1 जून 2025 (Controller General of Accounts के डेटा के अनुसार) — वित्त वर्ष 2025‑26 के पहले तीन महीनों (अप्रैल से जून 2025) में केंद्र सरकार का वित्तीय घाटा (Fiscal Deficit) ₹2.80 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो पूरे वर्ष के लक्ष्य का 17.9% है। यह पिछले वर्ष की 8.4% (अप्राइस–जून 2024) के मुकाबले लगभग दोगुना है ।


📈 प्रमुख संकेतक और प्रवृत्तियाँ

तत्वआंकड़ा (Q1 FY26)पिछले वर्ष (Q1 FY25)
वित्तीय घाटा₹2.80 लाख करोड़ (17.9%)₹1.36 लाख करोड़ (8.4%)
पूंजीगत व्यय (Capex)₹2.75 लाख करोड़ (52% वृद्धि)₹1.81 लाख करोड़
राजस्व व्यय (Revenue Expenditure)₹9.47 लाख करोड़ (20% वृद्धि)₹7.89 लाख करोड़
कुल व्यय₹12.22 लाख करोड़ (24.1% BE)₹9.70 लाख करोड़ (20.1% BE)
नेट टैक्स राजस्व₹5.40 लाख करोड़ (19% BE, 2% गिरावट)~₹5.50 लाख करोड़ (21.3% BE)
गैर‑कर राजस्व (RBI डिविडेंड सहित)₹3.73 लाख करोड़ (33% वृद्धि)₹2.80 लाख करोड़
कुल प्राप्तियाँ₹9.41 लाख करोड़ (26.9% BE)₹8.34 लाख करोड़

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राजस्व संग्रह में गिरावट रही जबकि खर्च में तेजी आई, और इस तरह घटता राजस्व घाटे को बढ़ाने में योगदान ।


🧩 कारण एवं रणनीतिक दृष्टिकोण

  1. पूर्व-गर्भित पूंजीगत व्यय (Front-loaded Capex)
    सरकार ने बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं में निवेश को बढ़ाया, जिससे पूंजीगत व्यय FY26 के BE का लगभग 25% केवल Q1 में ही पूरा हो गया ।
  2. महत्वपूर्ण राजकोषीय हस्तांतरण (RBI Dividend)
    RBI द्वारा रिकॉर्ड ₹2.69 लाख करोड़ का लाभांश वितरण सरकारी गैर‑कर राजस्व को मजबूती प्रदान करने वाला कारण बना ।
  3. कर संग्रह में कमी
    जून 2025 में direct tax collections में गिरावट आई, जो राजस्व कमी के पीछे प्रमुख वजह बनी; हालांकि इससे राज्यों को कर का हिस्सा देने में बाधा नहीं आई ।
  4. घाटे की तुलना पिछले वर्ष से
    FY25 में चुनावों के समय खर्च धीमा था; लेकिन इस वर्ष शुरुआत से ही खर्च में तेजी देखी गई, जिससे घाटा व्यापक रूप से बढ़ा।

🌐 व्यापक पृष्ठभूमि

  • केंद्र सरकार का पूरे FY26 के वित्तीय घाटे का अनुमान ₹15.69 लाख करोड़, यानी GDP का लगभग 4.4% है ।
  • FY25 में यह लक्ष्य करीब 4.8‑4.9% था, जिसे FY26 में और नीचे खींचने की योजना बनाई गई है ।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि इस केन्द्रित व्यय नीति एवं राजकोषीय संग्रह की दिशा सही रही, तो सरकार FY26 में निर्धारित छूट तक पहुंच सकते हैं।

🔍 विश्लेषण और प्रभाव

  • मजबूत सार्वजनिक निवेश के चलते आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे GDP की वृद्धि दर में सुधार संभव है। ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री आदिति नायर ने Q1 के पूंजीगत व्यय को प्रोत्साहन माना है, हालांकि यह पिछले कुछ वर्षों की तुलना में कम था लेकिन फिर भी अर्थव्यवस्था की गति बढ़ा सकता है।
  • झटके की चेतावनी
    राजस्व संग्रह थमा रहा है, और यदि खर्च जुलाई–मार्च के दौरान तेजी से बढ़ता रहा, तो बैंकिंग मार्केट में उधार दरों पर दबाव और मुद्रास्फीति बढ़ सकती है।
  • राजकोषीय अनुशासन
    सरकार की मौजूदा नीति परिपक्व लगती है, जिसमें राजस्व-व्यय और पूंजीगत निवेशों का संतुलन बनाकर घाटा तय सीमा (4.4%) तक सीमित करना लक्ष्य है।

📝 निष्कर्ष

Q1 FY26 में व्ययों की मजबूती और राजस्व संग्रह की कमी ने वित्तीय घाटे को लगभग दोगुना कर दिया, जो ऐतिहासिक रूप से ₹2.80 लाख करोड़ (17.9% BE) तक पहुंच गया। इस रुझान को नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण होगा ताकि वृद्धि की राह पर जारी वित्तीय नीति सुरक्षित बनी रहे—और सरकार निर्धारित कमी लक्ष्य (4.4% GDP) तक पहुंचने में सक्षम रहे।