- मामला आम आदमी पार्टी (AAP) नेता और पूर्व मंत्री सोनमण्ठ भारती की पत्नी लिपिका मित्रा द्वारा दर्ज किया गया है।
- लिपिका ने आरोप लगाया है कि 17 मई 2024 को लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके परिवार की व्यक्तिगत समस्याओं का उद्घाटन कर अपमानजनक और मानहानिक टिप्पणियाँ कीं, जो यूपीयोग हुआ कर भड़बड़ाहट भड़का सकती थी ।
🔹 क्या कहा गया आरोप में?
- शिकायत में कहा गया कि सीतारमण ने यह सब प्रेस, टीवी और यूट्यूब चैनलों पर बयान जारी करके किया, जिससे भारती के वैश्विक प्रतिष्ठा और चुनाव संभावनाओं को भारी नुकसान पहुँचा।
- लिपिका ने कोर्ट में बताया कि उनके रिश्ते की पुरानी झड़पें “8 मई 2019 को सुलझ गई थीं”, लेकिन मंत्री ने इसे जानबूझकर चुनावी लाभ के लिए फिर से उजागर किया ।
🔹 कोर्ट की कार्यवाही
- एडिशनल चीफ मजिस्ट्रेट पारस दलाल ने यह स्पष्ट किया कि मामला घ्यान लेने (cognizance) की स्थिति में है, और संविधान के भिन्ने प्रावधानों अनुच्छेद 223 का पालन करते हुए, आरोपी को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है ।
- इसी क्रम में 19 मई 2025 को निर्मला सीतारमण को नोटिस जारी कर 12 जून 2025 को अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया ।
🔹 शिकायतकर्ता की मांग
- लिपिका ने कोर्ट से निम्नलिखित मांग की है:
- मानहानि के आरोप के तहत सीतारमण को जवाब देने की,
- भविष्य में ऐसी टिप्पणियाँ रोकने की,
- और सोशल मीडिया/चैनलों से मानहानि सामग्री हटाने की कार्रवाई करने का निर्देश देने की ।
🔹 राजनीतिक पृष्ठभूमि और व्यापक प्रभाव
- यह मामला BJP–AAP के बीच चुनावी टकराव का नया अध्याय बनता प्रतीत होता है।
- आरोप का उद्देश्य चुनावी क्षति पहुँचाना—विशेषकर नई दिल्ली संसदीय सीट पर—यह बताता है कि दोनों दलों के बीच सत्ता-संबंधी संघर्ष अभी भी जारी है ।
- नोटिस जारी होना इस मामले को आगे की गंभीर कानूनी लड़ाई की ओर ले जा रहा है।
🔹 अगला चरण
- अगली सुनवाई 12 जून 2025 को दोपहर 12:30 बजे निर्धारित है। उस दिन वित्त मंत्री या उनके कानूनी प्रतिनिधि को अदालत में उपस्थित होना होगा और अपनी ओर से अपना बचाव प्रस्तुत करना होगा ।
🧭 निष्कर्ष
दिल्ली की Rouse Avenue कोर्ट की यह कार्रवाई दर्शाती है कि राजनीतिक आंकड़ों के बीच भी कानूनी सीमाएँ हैं। निर्मला सीतारमण को नोटिस भेजना एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे यह साफ़ हो गया है कि राजनीतिक विमर्श में मानहानि जैसी गंभीर कानूनी चुनौतियाँ भी खड़ी हो सकती हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 12 जून को किस ओर झुकेत है अदालत का रुख—क्या केंद्रीय मंत्री अपना बयान वापस लेंगी या नियमानुसार सफाई देंगी?

