आत्मविश्वास की शक्ति किसी भी व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की प्रगति की बुनियाद होती है। जब किसी देश के नागरिक अपने सामर्थ्य पर विश्वास करते हैं, तब बड़े से बड़ा लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। आज भारत जिस विकसित भारत के संकल्प की ओर बढ़ रहा है, उसके केंद्र में आत्मविश्वास ही सबसे बड़ा आधार है।
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए विचार यह स्पष्ट करते हैं कि आत्मविश्वास केवल भावना नहीं, बल्कि एक कार्यशील ऊर्जा है। यही ऊर्जा व्यक्ति को साहस देती है, उसे निर्णय लेने में सक्षम बनाती है और कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। आत्मविश्वास की शक्ति के बिना न नवाचार संभव है और न ही आत्मनिर्भरता।
भारत के युवाओं, किसानों, श्रमिकों और उद्यमियों—सभी के लिए आत्मविश्वास एक समान रूप से आवश्यक है। जब युवा अपने कौशल पर भरोसा करता है, तब स्टार्टअप खड़े होते हैं। जब किसान अपने परिश्रम पर विश्वास करता है, तब उत्पादन बढ़ता है। इसी तरह, हर क्षेत्र में आत्मविश्वास भारत को मजबूत बनाता है।
भारतीय संस्कृति में आत्मबल को सदैव महत्व दिया गया है। यही कारण है कि आज भी संस्कृत सुभाषितम और प्राचीन ग्रंथ आधुनिक भारत को दिशा दिखा रहे हैं। आत्मविश्वास की शक्ति हमें सिखाती है कि स्थायी सफलता संयम, दक्षता और निरंतर प्रयास से ही मिलती है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
प्रश्न 1: आत्मविश्वास की शक्ति क्यों जरूरी है?
उत्तर: आत्मविश्वास निर्णय क्षमता बढ़ाता है और असफलता के डर को कम करता है।
प्रश्न 2: क्या आत्मविश्वास विकसित किया जा सकता है?
उत्तर: हां, निरंतर अभ्यास, सीख और अनुभव से आत्मविश्वास बढ़ाया जा सकता है।
प्रश्न 3: विकसित भारत में आत्मविश्वास की क्या भूमिका है?
उत्तर: आत्मविश्वासी नागरिक ही नवाचार और विकास को गति देते हैं।

