📌 विपक्ष की संयुक्त पहल: 16 पार्टियों ने PM को लिखा पत्र
16 विपक्षी दलों—जिसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, DMK, TMC, शिवसेना (UBT), RJD, CPI(M), IUML, CPI, RSP आदि शामिल हैं—ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक संयुक्त पत्र लिखा। पत्र में संसद का विशेष सत्र बुलाकर Operation Sindoor, Pahalgam हमला, हालिया Ceasefire और सुरक्षा नीतियों पर विस्तृत चर्चा की माँग की गई है ।
ये सांसद आग्रह कर रहे हैं कि संसद के मानसून सत्र से पहले चर्चा हो ताकि देश की सुरक्षा के सवालों का विमर्श पारदर्शिता से हो सके ।
🔎 सरकार की प्रतिक्रिया: फिलहाल कोई योजना नहीं
सरकार ने साफ़ कहा है कि इस महीने विशेष सत्र बुलाए जाने की कोई योजना नहीं है। लोकसभा तथा राज्यसभा सचिवालय को भी ऐसी किसी चर्चा के संकेत नहीं मिले हैं ।
इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया गया है कि जून में विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना बेहद कम है, और समय पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
🗣️ विपक्ष का मुख्य तर्क: पारदर्शिता और जवाबदेही
विपक्ष का कहना है कि Operation Sindoor और Pahalgam हमले पर जनता को संसद के माध्यम से सरकार की नीतियों व सैन्य कार्रवाई में पूरी जानकारी मिलनी चाहिए। General Anil Chauhan के बयान—कि ऑपरेशन के पहले दिन भारतीय लड़ाकू विमानों को नुक़सान हुआ था—के बाद विपक्ष ने विशेष सत्र की मांग और जोरदार कर दी है ।
वे यह भी आरोप लगा रहे हैं कि सरकार Trump द्वारा Ceasefire की मध्यस्थता के संदर्भ में पारदर्शी नहीं रही और जनता के सवालों से सफेद झूठ वाले दावों को दबाया गया ।
📋 मुद्दों का सार: सांसदों की मांगें
| मुद्दा | विवरण |
|---|---|
| Operation Sindoor | Pahalgam के संदर्भ में भारत की जवाबदेही व सैन्य कार्रवाई चर्चा का विषय बने |
| Ceasefire की घोषणा | Trump की मध्यस्थता व निर्बाध घोषणा पर खुलकर चर्चा हो |
| फाइटर जेट नुकसान | General Chauhan द्वारा दिए गए नुकसान के बयान पर स्पष्टीकरण |
| राष्ट्रीय सुरक्षा नीति | सरकार की रणनीति, तैयारी और भविष्य की नीति पर बहस |
⚖️ निष्कर्ष
विपक्ष की मांग इस बात पर केंद्रित है कि Operation Sindoor बीते राष्ट्रीय सुरक्षा दिवसों की गूंज होनी चाहिए, और सरकार को संसद के ज़रिए अपनी कार्रवाई का पूरा ब्योरा जनता तक पहुँचाना चाहिए। वहीं सरकार का रुख स्पष्ट है कि “अभी विशेष सत्र बुलाने की कोई योजना नहीं”।
विपक्ष की इस मांग ने सुरक्षा नीति और विदेशी मध्यस्थता पर राजनीतिक संवाद को नया रूप दिया है—क्या सरकार जल्द ही अपनी चुप्पी तोड़ती है, यह आगामी समय में ही स्पष्ट होगा।

