असम और पूर्वोत्तर में बाढ़ की तबाही: 7 लाख से अधिक लोग प्रभावित, राहत कार्य जारी

असम और पूर्वोत्तर में बाढ़ की तबाही: 7 लाख से अधिक लोग प्रभावित, राहत कार्य जारी


⚠️ भीषण बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त

असम समेत पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्से इन दिनों भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। ब्रह्मपुत्र, बराक, और उनकी सहायक नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे 7 लाख से अधिक लोग प्रभावित हो चुके हैं।

राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन बल लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं, लेकिन हालात अभी भी गंभीर बने हुए हैं।


📍 सबसे ज्यादा प्रभावित जिले

जिलाप्रभावित लोगराहत शिविर
बारपेटा1.2 लाख55
धुबरी1.1 लाख40
नगांव85,00030
बक्सा70,00025
डिब्रूगढ़50,00018

🌧️ लगातार भारी बारिश और नेपाल की तरफ से छोड़े गए पानी के कारण नदियाँ उफान पर हैं।


🚨 स्थिति की गंभीरता

  • फसलें नष्ट: 40,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि जलमग्न
  • पुल–सड़कें टूटीं: 170 से अधिक सड़कें और 23 छोटे पुल क्षतिग्रस्त
  • मवेशियों की हानि: लगभग 18,000 मवेशियों की मृत्यु
  • स्कूल बंद: प्रभावित जिलों में 500+ स्कूल अस्थायी रूप से बंद

🛶 राहत कार्य की स्थिति

  • राज्य आपदा प्रबंधन बल (ASDMA) और NDRF की 25 टीमें तैनात
  • 700 से अधिक राहत शिविरों में शरण ले रहे लोग
  • हेलिकॉप्टर और नावों के माध्यम से पानी, खाद्य सामग्री, दवाइयाँ और कपड़े पहुँचाए जा रहे हैं
  • डॉक्टरों की मोबाइल यूनिट बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय

🧾 सरकार का बयान

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा:

हम हर प्रभावित परिवार तक पहुँचने के लिए प्रतिबद्ध हैं। केंद्र सरकार से भी अतिरिक्त सहायता प्राप्त हो रही है। हमने प्रभावित जिलों में तत्काल सहायता राशि जारी कर दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्थिति का संज्ञान लिया और ट्वीट कर कहा:

पूर्वोत्तर में बाढ़ की स्थिति दुखद है। NDRF और सेना को राहत कार्यों के लिए पूरी तरह से तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।


📷 लोगों की व्यथा

  • किशोरी देवी (बारपेटा): “हमारा घर पूरी तरह डूब गया है, सिर्फ़ छत पर बचा है।”
  • रफीक अहमद (नगांव): “दो दिन से खाना नहीं मिला था, आज राहत शिविर से कुछ मिला।”
  • राहुल दास (छात्र): “पढ़ाई रुक गई है, स्कूल जलमग्न है।”

🌍 पर्यावरणविदों की चेतावनी

बाढ़ की तीव्रता हर साल बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • जलवायु परिवर्तन के चलते बारिश का पैटर्न असामान्य हो गया है
  • नदियों के किनारे अनियोजित निर्माण से जलप्रवाह बाधित हो रहा है
  • वनों की कटाई भी आपदा को और अधिक गहरा बना रही है

📢 जनता के लिए निर्देश

सरकार और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने आम जनता से अनुरोध किया है:

  • अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें
  • जलमग्न क्षेत्रों से दूर रहें
  • बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाएं
  • किसी भी आपातकाल में 1070 (ASDMA हेल्पलाइन) पर कॉल करें

🔚 निष्कर्ष

असम और पूर्वोत्तर भारत इस समय एक गंभीर प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। जहां प्रशासन अपनी ओर से हरसंभव प्रयास कर रहा है, वहीं ज़रूरत है जनता की सजगता और सहयोग की। यह वक्त एकजुटता और संवेदना का है।