उरी सेक्टर में भारी गोलाबारी, पाकिस्तान ने किया सीज़फ़ायर उल्लंघन

उरी सेक्टर में भारी गोलाबारी, पाकिस्तान ने किया सीज़फ़ायर उल्लंघन


9 मई की रात से पाकिस्तान ने जम्मू‑कश्मीर के उरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतर्राष्ट्रीय सीमा (IB) पर भारी गोलाबारी शुरू कर दी। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने मोर्टार, तोप (आर्टिलरी) और छोटे हथियारों (small arms) का प्रयोग किया, जिससे कई क्षेत्र प्रभावित हुए। खानपान, पानी की टैंकी, स्कूलें और घरों को भारी नुकसान हुआ और कुछ मौके पर नागरिक भी घायल हुए हैं ।

नागरिकों और सुरक्षा बलों पर प्रभाव

  • उरी, कुपवाड़ा, पूंछ, राजौरी क्षेत्रों में लगातार गोलाबारी। स्थानीय निवासियों ने कहा कि “गृहस्थी अस्त‑व्यस्त हो गई, कई परिवार रात से जागते रहे।”
  • उरी में कम से कम एक महिला नागरिक की मौत और कई घरों को क्षति पहुँची ।

🇮🇳 भारत का रणनीतिक और कूटनीतिक जवाब

पीएम मोदी की आपात बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुरंत उच्च‑स्तरीय बैठक बुलाई। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवाल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, और आर्मी, नेवी एवं एयर फोर्स के प्रमुख तथा CDS शामिल हुए । बैठक का प्रमुख उद्देश्य था स्थिति का आकलन करना, आगे की रणनीति एवं कार्रवाई मार्गदर्शित करना।

सुरक्षा बलों की सतर्कता

सरकार ने जम्मू‑कश्मीर, पंजाब और राजस्थान में सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा। स्थानीय नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने का अनुरोध किया गया।


🌐 अमेरिका‑मध्यस्थता में सीज़फ़ायर चर्चा

4–5 दिन तक जारी रहने वाली लड़ाई और गोलाबारी के बाद, दोनों देशों ने अमेरिकी मध्यस्थता में 10 मई को तत्काल और पूर्ण ट्रUCEफायर पर सहमति व्यक्त की ।

उल्लंघन जारी — आरोप‑प्रत्यारोप

  • भारत ने पाकिस्तानी सेना पर सीज़फ़ायर उल्लंघन का आरोप लगाया और जवाबी कार्रवाई का आश्वासन दिया ।
  • पाकिस्तान ने भारत द्वारा उल्लंघन किये जाने का अपना पक्ष रखा और निष्पक्ष जांच की मांग की ।

🔍 विश्लेषण और निष्कर्ष

  1. उरी में आक्रामक युद्धवातावरण — पाकिस्तान की गोलाबारी ने सीमा पार स्थिति को तनावपूर्ण कर दिया।
  2. भारत का संगठित सैन्य–कूटनीतिक जवाब — पीएम की बैठक और हाई अलर्ट ने स्थिति नियंत्रण में लाने का संकेत दिया।
  3. सीज़फ़ायर का आलोचना और आगे की चुनौतियाँ — घोषणात्मक ट्रUCEफायर के बाद भी उल्लंघन की खबरें जारी रहीं, जिससे स्थिति अस्थिर बनी रही।

इस घटना ने यह स्पष्ट किया कि भारत-पाक नियंत्रण रेखा पर रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक मिशनों को लेकर बेहद सतर्क और सक्रिय है, और तत्काल कूटनीतिक समाधान की भी आवश्यकता है।