1. बैठक की पृष्ठभूमि
- हाल ही में 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत-पाक सीमा पर तनाव बढ़ा, और सरकार ने 1960 के इंडस वॉटर ट्रीटी (Indus Waters Treaty) को स्थगित करने (abeyance) का निर्णय लिया ।
- इसके तहत, दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह, जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, विदेश मंत्री जयशंकर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी इस विषय में बैठक करने के लिए एकत्रित हुए ।
2. बैठक में चर्चाएं और रणनीति
- बैठक में तीन चरणों की रणनीति तैयार की गई—तत्काल (short), मध्यम (medium) और दीर्घकालीन (long-term) – ताकि “पाकिस्तान तक एक भी बूंद पानी नहीं जाए” और पूरे निर्णय को प्रभावी रूप से लागू किया जा सके ।
- इसके लिए प्रमुख कदम उठाए जाएंगे जैसे कि सिंधु, झेलम और चेनाब जैसी पश्चिमी नदियों से पानी रोकना या पुनर्निर्देशित करना—जिसमें सबसे पहले डीसिल्टिंग, बैरिज क्षमता बढ़ाना, तथा नई परियोजनाओं पर तेजी से कार्रवाई शामिल है ।
3. सरकारी नोटिफिकेशन और आधिकारिक संवाद
- भारत ने पाकिस्तान को औपचारिक रूप से पत्र भेजकर इंडस वॉटर ट्रीटी को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने की सूचना दी। यह नोटिफिकेशन जल शक्ति मंत्रालय की सचिव देवश्री मुखर्जी ने पाकिस्तान के समकक्ष को भेजा ।
- पत्र में कहा गया कि खिलाफ़ी परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं, जैसे आबादी, ऊर्जा विकास, और जल वितरण की परिस्थितियाँ—साथ ही पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकी घटनाएँ ट्रीटी के उद्देश्यों का उल्लंघन कर रही हैं ।
4. सी.आर. पाटिल का बयान
- जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने स्पष्ट कहा: “भारत सरकार का मकसद है कि एक भी बूंद पानी पाकिस्तान तक न पहुंचे। जल्द ही इसे लागू किया जाएगा।”
- बैठक के बाद उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय ने कदम उठाने के लिए रणनीति तैयार की है, जिसमें तकनीकी और प्रशासनिक सुधार शामिल हैं ।
5. पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
- पाकिस्तान ने इस कदम को कड़ा विरोध जताया, और चेताया कि भारत का कोई भी पानी रोकने का प्रयास “युद्ध की घोषणा” जैसा माना जाएगा ।
- पाकिस्तान में इस फैसले को “खेतों तक पानी न आने देने” की सोची समझी रणनीति माना गया, जिससे द्विपक्षीय तनाव और बढ़ सकता है ।
6. अंतर्राष्ट्रीय कानूनी व कूटनीतिक आयाम
- माना जा रहा है कि भारत ऑफिशियल कानूनी उत्तर तैयार कर रहा है ताकि भविष्य में वर्ल्ड बैंक या अन्य संस्थान द्वारा किसी दबाव को उत्तर दिया जा सके ।
- इसके साथ ही, भारत की यह रणनीति कूटनीतिक स्तर पर भी मुद्दा बन रही है, जहाँ भारत विदेशों में यह स्पष्ट कर सकता है कि यह कदम आतंकवाद को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
7. आगामी कार्रवाई
- तत्काल कदम के रूप में डैम निर्माण और नदियों का पुनर्निर्देशन शुरू किया जाएगा।
- मध्यम अवधि में टूलबुल बॅरेज जैसे योजनाएं तेज गति से आगे बढ़ेंगी और दीर्घकालिक रूप से पानी का नीति–नियंत्रण सशक्त किया जाएगा ।
📝 निष्कर्ष
30 अप्रैल की इस बैठक ने स्पष्ट किया कि भारत ने इंडस वॉटर ट्रीटी को राजनीति और सुरक्षा रणनीति दोनों नजरिए से समीक्षा में रखा है। यह सिर्फ एक जलडमरूमध्य समझौता नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा नीति, और क्षेत्रीय संतुलन का प्रतिनिधित्व करता है।
इस कदम से अगले समय में न केवल भारत-पाक तनाव में वृद्धि देखी जा सकती है, बल्कि द्विपक्षीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जल नीति गतिशीलता महत्वपूर्ण रुप से प्रभावित हो सकती है।

