भारतीय मौसम विभाग (India Meteorological Department, IMD) ने दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून–सितंबर 2025) के लिए अपना द्वितीय-स्तरीय दीर्घकालिक पूर्वानुमान (Long Range Forecast) जारी किया, जिसमें देश स्तर पर बारिश 106% LPA (Long Period Average) अनुमानित की गई है, जो अप्रैल में आए 105% अनुमान से 1% अधिक है ।
📈 मौसमी वर्षा का सुधार: पहले 105%, अब 106%
- अप्रैल के पहले अनुमान में बारिश का अनुमान 105 ± 5% LPA था, जबकि अब दूसरा अनुमान 106 ± 4% LPA कर दिया गया है, जो “सामान्य से अधिक” वर्षा श्रेणी (105–110% LPA) में आता है ।
- पूरे सीजन की औसत बारिश लगभग 87 सेमी होती है, जो गणना अवधि 1971–2020 पर आधारित है ।
🌧️ क्षेत्रीय पूर्वानुमान: कौन कहां किस श्रेणी में रहेगा?
| क्षेत्र | वर्षा अनुमान |
|---|---|
| मध्य भारत एवं दक्षिण प्रायद्वीप | सामान्य से अधिक (>106 %) |
| मॉनसून कोर ज़ोन (MCZ) | Above‑normal |
| उत्तर-पश्चिम भारत | सामान्य (92–108 % LPA) |
| पूर्वोत्तर भारत | सामान्य से कम (<94 %) |
एमसीज़ेड—जो भारत की वर्षा-आधारित कृषि भूमि का मुख्य हिस्सा है—उच्च वर्षा मिलने की उम्मीद है, जिससे खरीफ फसलों को सहारा मिलेगा ।
🗓️ जून माह विशेष: 108% से अधिक बारिश संभव
- जून 2025 में अनुमानित बारिश 108% LPA से अधिक हो सकती है, जो जून के लिए सामान्य से ऊपर का संकेत है ।
- मुंबई, मध्य भारत, और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में यह प्रभाव विशेष रूप से दिख सकता है ।
🌡️ तापमान के रुझान: मानसून से मिलेगी राहत
- अधिकांश क्षेत्रों में जून की अधिकतम तापमान सामान्य या उससे कम रहने की संभावना है।
- पूर्वोत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है।
- न्यूनतम तापमान सामान्य या उससे ऊपर रहने की संभावना बनी हुई है, सिवाय कुछ दक्षिणी और मध्य भारत के हिस्सों में जहां न्यूनतम तापमान सामान्य या निचले स्तर हो सकता है ।
🧪 जल संसाधन और कृषि रणनीति पर प्रभाव
- नदी-जलाशयों और जल भंडारण प्रणाली पर प्रभाव
बेहतर वर्षा से जलाशयों में स्तर सुधरेगा, जिससे सिंचाई और पीने योग्य जल की उपलब्धता में वृद्धि होगी। - कृषि उत्पादन और खरीफ फसलें
उपज में सुधार संभव है—खरबूजा, धान, गन्ना, सोयाबीन जैसी खरीफ फसलें लाभान्वित होंगी। - मुद्रास्फीति और खाद्य सुरक्षा
आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे मुद्रास्फीति पर दबाव कम हो सकता है। - बाढ़ / अतिवृष्टि सम्भावनाएँ
उच्च वर्षा से खासकर संवेदनशील अवस्थाओं में—जैसे कुछ पूर्वोत्तर क्षेत्रों में—स्थानीय जलभराव और बाढ़ की आशंका बनी रह सकती है। - नीति और कृषि-प्रबंधन योजना
राज्य सरकारें और किसान मिलकर जल संरक्षण, कट-फसली खेती, और बोआई प्रबंधन रणनीति विकसित कर सकते हैं।
✍️ निष्कर्ष
IMD का यह नया पूर्वानुमान—106% LPA—यह संकेत देता है कि मानसून 2025 का मौसम सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है, जिसके कृषि उत्पादन, जल प्रबंधन और आर्थिक व्यवस्था पर सकारात्मक प्रभावों की उम्मीद है।

