भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में विकासशील देशों के हितों की सुरक्षा और संगठन में संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।
भारत के वाणिज्य मंत्री का बयान:
“WTO को निष्पक्ष और न्यायसंगत बनाना समय की मांग है। भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर वैश्विक व्यापार में पारदर्शिता और संतुलन सुनिश्चित करेंगे।”
— पियूष गोयल, केंद्रीय वाणिज्य मंत्री
प्रस्तावित सुधारों में शामिल:
- विवाद समाधान प्रणाली में पारदर्शिता
- कृषि सब्सिडी विवादों पर निष्पक्ष निर्णय
- E-commerce और डिजिटल ट्रेड में विकासशील देशों को अधिक लचीलापन
- जलवायु-आधारित व्यापार प्रतिबंधों पर स्पष्ट दिशानिर्देश
🇮🇳🤝🇦🇺 द्विपक्षीय व्यापार और रणनीतिक समझौतियाँ
- दोनों देशों ने रक्षा उत्पादन, रेयर अर्थ मिनरल्स और शिक्षा एक्सचेंज जैसे क्षेत्रों में समझौतों की समीक्षा की।
- साल 2024 में भारत–ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय व्यापार $28 बिलियन डॉलर के पार हो गया था — इसे 2030 तक $50 बिलियन तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।
🗣️ विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों ने इस वार्ता को भारत की Act East Policy और क्वाड (QUAD) रणनीति को मज़बूत करने वाला बताया। इसके साथ ही WTO में ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित राष्ट्र का समर्थन भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका को और ताकत देगा।
✍️ निष्कर्ष:
भारत‑ऑस्ट्रेलिया वार्ता न केवल रक्षा और आतंकवाद से निपटने में सहयोग को मजबूत करती है, बल्कि वैश्विक मंचों पर न्यायसंगत व्यापार व्यवस्था की आवाज को बुलंद करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल है। Indo-Pacific में स्थिरता और WTO जैसे संस्थानों में लोकतांत्रिक सुधारों के लिए यह द्विपक्षीय संवाद मील का पत्थर साबित हो सकता है।

