भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना: नीति आयोग का बयान

भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना: नीति आयोग का बयान


भारत ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति को और मजबूत करते हुए, अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का गौरव प्राप्त किया है। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि उस समय हासिल हुई है जब भारत ने जापान को पीछे छोड़ते हुए 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का आंकड़ा पार कर लिया है। नीति आयोग के सीईओ, बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने आज इस ऐतिहासिक घटना की घोषणा की और इसके भारत के भविष्य के लिए बड़े सकारात्मक प्रभावों पर चर्चा की।

भारत की अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक बढ़त

भारत का आर्थिक विकास पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है और देश ने विभिन्न क्षेत्रों में सुधार की दिशा में कई कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में देश ने बड़े सुधारों को लागू किया, जिनमें GST, डिजिटल इंडिया, और मेक इन इंडिया जैसे पहल शामिल हैं। इसके अलावा, भारत की बढ़ती मध्यम वर्ग की संख्या, बढ़ती निर्यात क्षमता, और बुनियादी ढांचे में सुधार ने भी इस वृद्धि को संभव बनाया है।

बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने कहा, “यह न केवल एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, बल्कि यह भारत के आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इस उपलब्धि से यह स्पष्ट होता है कि भारत की अर्थव्यवस्था की संरचना में बदलाव आ चुका है, और अब यह दुनिया के अग्रणी देशों के बीच शुमार हो गई है।”

क्या हैं इसके कारण?

भारत की 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की कई वजहें हैं:

  1. उद्योग और सेवाओं में वृद्धि: भारत में आईटी, टेलीकॉम, ऑटोमोबाइल, और खुदरा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में वृद्धि देखी गई है। इन उद्योगों ने न केवल रोजगार सृजन किया है, बल्कि विदेशों से निवेश भी आकर्षित किया है।
  2. कृषि और ग्रामीण विकास: कृषि क्षेत्र में सुधार, कृषि आधारित बुनियादी ढांचे में निवेश और ग्रामीण इलाकों में विकास ने भी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की है।
  3. निर्यात और वैश्विक व्यापार: भारत ने अपनी निर्यात क्षमता को बढ़ाने में भी सफलता हासिल की है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की बढ़ती भूमिका ने उसे एक प्रमुख आर्थिक शक्ति बना दिया है।
  4. नौकरशाही और सरकार के सुधार: भारत सरकार ने भ्रष्टाचार को कम करने, वित्तीय सुधारों और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता में सुधार किया है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।

जापान को पीछे छोड़ने का महत्व

भारत का जापान को पीछे छोड़ना न केवल एक आर्थिक उपलब्धि है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती ताकत और प्रभाव को भी दर्शाता है। जापान, जो पहले एशिया में भारत का मुख्य आर्थिक प्रतिद्वंदी था, अब भारत से पीछे है, और इसका सीधा प्रभाव वैश्विक व्यापार, निवेश और कूटनीतिक रिश्तों पर पड़ेगा।

नीति आयोग के सीईओ ने बताया कि इस विकास से भारत को कई नए अवसर मिलेंगे। जैसे कि व्यापारिक साझेदारी, वैश्विक मंच पर अधिक आवाज़, और विदेशी निवेश में वृद्धि। भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था को दुनिया भर के निवेशक अब एक आकर्षक बाजार के रूप में देखेंगे, जिससे घरेलू उद्योगों को भी लाभ मिलेगा।

आगे का रास्ता

अब जब भारत ने 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का आंकड़ा पार किया है, तो यह केवल शुरुआत है। सरकार और नीति निर्माता अब 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत को अपनी इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य, और शोध एवं विकास के क्षेत्र में और निवेश करने की आवश्यकता होगी।

इसके साथ ही, भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका को और मजबूत करना होगा, ताकि उसे भविष्य में और अधिक अवसर प्राप्त हों। इसके अलावा, बढ़ती हुई जनसंख्या और शहरीकरण की दिशा में सुधार की आवश्यकता होगी ताकि यह वृद्धि टिकाऊ और समावेशी बनी रहे।

समाप्ति

भारत की 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण मील का पत्थर है। यह देश की मेहनत, नीति सुधारों और वैश्विक आर्थिक स्थिति में बदलाव का परिणाम है। भविष्य में यह उम्मीद की जाती है कि भारत अपनी आर्थिक स्थिति को और मजबूत करेगा और दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक ताकतों में एक प्रमुख स्थान बनाए रखेगा।