भारत और भूटान के बीच भारत-भूटान ऊर्जा सहयोग लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। हाल ही में नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक ने इस सहयोग को और मजबूत आधार दिया है। बैठक में जलविद्युत परियोजनाओं, विद्युत पारेषण व्यवस्था और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों पर विस्तार से चर्चा हुई।
भारत-भूटान ऊर्जा सहयोग की शुरुआत वर्ष 1961 में हुई थी। इसके बाद 2006 में जलविद्युत सहयोग समझौते ने इसे संस्थागत रूप दिया। इस साझेदारी से भूटान को आर्थिक स्थिरता मिली है, जबकि भारत को स्वच्छ और भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत प्राप्त हुए हैं।
बैठक में पुनात्सांगचू प्रथम और द्वितीय जलविद्युत परियोजनाओं पर खास जोर दिया गया। इन परियोजनाओं से बिजली उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, संकोश जलविद्युत परियोजना के दीर्घकालिक भविष्य पर भी विचार किया गया। दोनों देशों ने 2040 तक की विद्युत पारेषण योजना पर मिलकर काम करने की सहमति जताई।
भारत-भूटान ऊर्जा सहयोग केवल बिजली तक सीमित नहीं है। यह रणनीतिक विश्वास, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह सहयोग दक्षिण एशिया में ऊर्जा संतुलन का अहम आधार बनेगा।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
प्रश्न 1: भारत-भूटान ऊर्जा सहयोग क्यों महत्वपूर्ण है?
यह सहयोग स्वच्छ ऊर्जा, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम है।
प्रश्न 2: किन परियोजनाओं पर चर्चा हुई?
पुनात्सांगचू प्रथम, पुनात्सांगचू द्वितीय और संकोश जलविद्युत परियोजना।
प्रश्न 3: भारत को इससे क्या लाभ मिलता है?
भारत को स्थायी और भरोसेमंद जलविद्युत ऊर्जा मिलती है।

