केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री Gajendra Singh Shekhawat ने कहा है कि Narendra Modi के नेतृत्व में भारत आज बौद्ध चिंतन पर आधारित संवाद के एक सशक्त वैश्विक मंच के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन बौद्ध परंपरा, शांति, करुणा और सह-अस्तित्व के संदेश के माध्यम से पूरी दुनिया को नई दिशा दे रही है।शेखावत ने यह बात एक अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन के दौरान कही, जहां विभिन्न देशों से आए विद्वानों, भिक्षुओं और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने बौद्ध विरासत को केवल सांस्कृतिक धरोहर के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति और संवाद का माध्यम बनाया है। बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर जैसे पवित्र स्थलों के विकास से भारत ने बौद्ध पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।उन्होंने आगे कहा कि बौद्ध दर्शन आज के समय में संघर्ष, हिंसा और असहिष्णुता से जूझती दुनिया के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। भारत की पहल पर आयोजित वैश्विक बौद्ध संवाद कार्यक्रमों ने यह साबित किया है कि विचारों की शक्ति से विश्व में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। भारत का यह प्रयास न केवल आध्यात्मिक नेतृत्व को मजबूत करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति और संवाद की संस्कृति को भी बढ़ावा देता है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
प्रश्न 1: भारत को बौद्ध चिंतन का वैश्विक मंच क्यों माना जा रहा है?
उत्तर: क्योंकि भारत ने बौद्ध दर्शन को अंतरराष्ट्रीय संवाद और कूटनीति से जोड़ा है।
प्रश्न 2: प्रधानमंत्री मोदी की इसमें क्या भूमिका है?
उत्तर: उन्होंने बौद्ध विरासत और पर्यटन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दिया है।
प्रश्न 3: बौद्ध चिंतन आज के समय में क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह शांति, करुणा और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाता है।

