भारत में मत्स्य उत्पादन बीते कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है और अब यह कृषि क्षेत्र का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश का कुल मत्स्य उत्पादन 2014-15 के 102.60 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 197.75 लाख टन तक पहुंच गया है। यह वृद्धि योजनाबद्ध निवेश और आधुनिक तकनीक का परिणाम है।
समुद्री और अंतर्देशीय दोनों क्षेत्रों में मत्स्य उत्पादन ने नई ऊंचाई छुई है। समुद्री मत्स्य उत्पादन जहां 46 लाख टन से अधिक हुआ है, वहीं अंतर्देशीय उत्पादन 151 लाख टन के पार पहुंच गया। इससे मछुआरों और मत्स्य किसानों की आय में स्थिरता आई है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) ने इस क्षेत्र को नई दिशा दी है। योजना के तहत हैचरी, ब्रूड बैंक, समुद्री शैवाल खेती और पर्ल कल्चर को बढ़ावा मिला है। इससे रोजगार के नए अवसर भी बने हैं।
निर्यात के मोर्चे पर भी मत्स्य उत्पादन का असर साफ दिखता है। भारत का समुद्री खाद्य निर्यात अब 130 से अधिक देशों तक पहुंच चुका है। प्रोसेसिंग क्षमता और वैल्यू-एडेड उत्पादों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
यह रिपोर्ट दर्शाती है कि सही नीति और निवेश से मत्स्य उत्पादन न केवल किसानों की आय बढ़ा सकता है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देता है।
FAQs (Hindi)
Q1. भारत में मत्स्य उत्पादन क्यों बढ़ रहा है?
सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीक और निवेश के कारण उत्पादन बढ़ा है।
Q2. PMMSY योजना का लाभ किसे मिलता है?
मत्स्य किसान, मछुआरे और फिशरी से जुड़े उद्यमी इसका लाभ लेते हैं।
Q3. क्या मत्स्य उत्पादन से रोजगार बढ़ा है?
हां, ग्रामीण और तटीय क्षेत्रों में नए रोजगार बने हैं।

