जम्मू-कश्मीर में 22 अप्रैल को पहलगाम घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की मौत के तुरंत बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाए। इस हमले के परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच कई पुराने द्विपक्षीय समझौतों को निलंबित कर तनाव चरम पर पहुँच गया।
🛑 प्रमुख निर्णय
- सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को निलंबित
भारत ने 23 अप्रैल को इस 1960 की विश्व बैंक मध्यस्थता वाली संधि को सुरक्षा कारणों से प्रभावी रूप से निलंबित कर दिया ।- अगले दिनों, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था मुख्यतः सिंचाई पर निर्भर—इससे “वाटर बम” जैसी चेतावनियाँ सामने आईं।
- इसी क्रम में, भारत ने चिनाब नदी पर बगलिहार बांध सहित बड़े जल-उपयोगी प्रोजेक्ट में पानी की निकासी को बढ़ाया ।
- शिमला समझौते (Simla Agreement) को पाकिस्तान द्वारा निलंबित
24 अप्रैल को पाकिस्तान ने भारत द्वारा उठाए गए कदमों के जवाब में 1972 के शिमला समझौते को समाप्त बताते हुए डिप्लोमैटिक वीजा प्रतिबंध, उड्डयन मार्ग बंदी व उच्चायोग कर्मचारियों की संख्या सीमित करने जैसे कड़े उपाय लागू किए ।- विशेषज्ञों ने चेताया कि इससे नियंत्रण रेखा पर मिले समझौतों का ढांचा कमजोर होगा ।
- डिप्लोमैटिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों में कटौती
- दोनों देशों ने राजनयिक कर्मियों की संख्या घटाई; भारत ने पाकिस्तानी सैन्य अटैचों को वापस बुलाया, जबकि पाकिस्तान ने भारतीय उच्चायोग से कर्मचारियों की संख्या 30 तक सीमित कर दी ।
- वाघा–अटारी सीमा क्रॉसिंग बंद कर दी गई और पाक वीजा निलंबन सहित वाणिज्य पूर्णतः रोक दिया गया ।
- आर्थिक व रणनीतिक प्रतिक्रियाएँ
- पाकिस्तान ने चेतावनी दी कि IWT जैसे समझौतों को तात्कालिक रूप से रद्द करना “युद्ध के समान” होगा ।
- भारत की विदेश मंत्रालय ने बयान दिया कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद नहीं रोकता, कोई समझौता बहाल नहीं होगा ।
🌍 क्षेत्रीय और रणनीतिक प्रभाव
- जल सुरक्षा संकट
पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था 80–90% सिंधु प्रणाली पर निर्भर है; पानी रोकने या मोड़ने से भू–अभाव और सामाजिक अस्थिरता की चेतावनी है । - संयुक्त राष्ट्र की एहतियातपूर्व अपील
अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र, ने दक्षिण एशिया में तनाव को देखते हुए संयम बरतने का आग्रह किया । - कूटनीतिक बचाव अभाव
शिमला जैसे समझौतों के निलंबन से LoC पर सक्रिय संवाद और संघर्ष को सीमित करने का तंत्र कमजोर हुआ है ।
🔚 निष्कर्ष
पहलागाम हमला एक ऐसा विभाजनकारी मोड़ साबित हुआ, जिसने पुराने द्विपक्षीय समझौतों की पीठ पर वार किया। जल, जमीन, वायुमार्ग, कूटनीतिक एवं रणनीतिक सभी मोर्चों पर दोनों देशों ने कठोर रुख अपनाया। इससे ना केवल मानव जीवन और व्यापार प्रभावित हुए, बल्कि आण्विक-रणनीतिक स्थिरता पर भी सवाल खड़े हो गए।
यदि आप किसी विषय—जैसे सिंधु जल संधि की कानूनी वैधता, शिमला समझौते के ऐतिहासिक पहलू, या इन कदमों के वैश्विक मतों—में गहराई से जानकारी चाहते हैं, तो कृपया बताएं!

