📍 घटना का विवरण
भारत ने 4 मई 2025 को जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में स्थित बगलिहार जलविद्युत परियोजना (Baglihar Hydroelectric Project) के सभी गेट बंद कर दिए, जिससे चिनाब नदी से पाकिस्तान को जाने वाला पानी लगभग 90% तक कम हो गया। यह कदम 23 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 भारतीय नागरिकों की हत्या के बाद भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ उठाए गए कड़े कदमों की श्रृंखला का हिस्सा है।
🔧 तकनीकी पहलू
बगलिहार बाँध एक ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ परियोजना है, जिसका उद्देश्य जलविद्युत उत्पादन है। भारत ने इस परियोजना में ‘डि-सिल्टिंग’ (de-silting) प्रक्रिया शुरू की, जिसके तहत बाँध के तल से कीचड़ और अवशेषों को हटाया जाता है। इस प्रक्रिया में बाँध के गेट खोलने पड़ते हैं, जिससे पानी का प्रवाह बढ़ जाता है। हालांकि, इस प्रक्रिया से पाकिस्तान को तत्काल पानी की आपूर्ति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा, लेकिन यह भविष्य में जल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।
🌐 अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
पाकिस्तान ने भारत के इस कदम को ‘युद्ध की घोषणा’ के रूप में लिया है और चेतावनी दी है कि यदि भारत ने जल आपूर्ति में कोई और हस्तक्षेप किया, तो वह पूरी ताकत से जवाब देगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा, “पानी की आपूर्ति में कोई भी हस्तक्षेप युद्ध के बराबर होगा।”
📊 रणनीतिक महत्व
भारत ने 23 अप्रैल को सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) को निलंबित कर दिया था, जिसके तहत पाकिस्तान को चिनाब, झेलम और सिंधु नदियों का पानी मिलता है। इस समझौते के तहत भारत को इन नदियों के पानी का सीमित उपयोग करने की अनुमति है, जैसे कि जलविद्युत उत्पादन और सिंचाई। भारत ने इस समझौते के निलंबन के बाद बगलिहार और सलाल बाँधों पर ‘डि-सिल्टिंग’ प्रक्रिया शुरू की, जिससे पाकिस्तान को जाने वाली जल आपूर्ति में कमी आई।
📌 निष्कर्ष
भारत का यह कदम पाकिस्तान के लिए गंभीर जल संकट का कारण बन सकता है, क्योंकि वह अपनी कृषि और जलविद्युत उत्पादन के लिए इन नदियों पर निर्भर है। हालांकि, भारत ने इस कदम को पाकिस्तान द्वारा पहलगाम हमले में शामिल होने के कारण उठाया है, लेकिन यह क्षेत्रीय जल विवादों को और बढ़ा सकता है। इस स्थिति में दोनों देशों के बीच जल आपूर्ति और पर्यावरणीय मुद्दों पर गंभीर बातचीत की आवश्यकता है।

