रूस ने स्पष्ट किया है कि भारत को एयर डिफेंस सिस्टम S‑400 त्रिउंफ़ की शेष दो स्क्वाड्रन 2025–26 तक संचालित कर दी जाएंगी। रूसी डिप्टी चीफ ऑफ मिशन रोमन बाबुश्किन ने यह जानकारी दी, साथ ही बताया कि हालिया भारत–पाक तनाव के दौरान इस सिस्टम ने बेहद सफल प्रदर्शन किया है।
🔹 अनुबंध और वितरण की स्थिति
- भारत और रूस ने 2018 में ₹40,000 करोड़ (US$ 5.43 बिलियन) का समझौता किया था, जिसमें पाँच S‑400 स्क्वाड्रन खरीदने का प्रावधान था ।
- अब तक तीन स्क्वाड्रन भारत को प्राप्त हो चुकी हैं, जिन्हें विभिन्न नाजुक क्षेत्रों (जैसे पंजाब‑जम्मू, सिक्किम, राजस्थान‑गुजरात) में तैनात किया गया है।
🕰️ नए वितरण समय-सीमा की पुष्टि
- पूर्व में अनुमान था कि शेष चौथा स्क्वाड्रन 2025 के अंत तक और पाँचवाँ 2026 तक प्राप्त हो जाएगा।
- हालिया SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में रूस ने पुष्टि की कि चौथा स्क्वाड्रन 2026 में आएगा और पांचवाँ 2027 तक ⏳— यानी सब कुछ 2026–27 तक पूरी तरह भारत को सौंपा जा सकता है ।
⚙️ S‑400 की क्षमताएं और सामरिक महत्व
- S‑400 ट्रायूम्फ एक अत्याधुनिक लंबी दूरी की सतह से वायु रक्षा प्रणाली है, जो 120 कीमी से 380 कीमी तक की दायरे में विमान, मिसाइल, ड्रोन, AWACS जैसे हवाई लक्ष्यों को वापस रोक सकती है ।
- भारत में इसे “सुदर्शन चक्र” नाम से जाना जाता है और यह भारतीय वायु सेना के एकीकृत कमांड सिस्टम (IACCS) से जुड़ा हुआ है ।
🛡️ हालिया प्रदर्शन और रक्षा नीति संदर्भ
- मई 2025 में उत्पन्न भारत–पाक तनाव (Operation Sindoor) के दौरान S‑400 ने उत्कृष्ट भूमिका निभाई; रूस ने इसकी “बहुत कुशल” प्रतिक्रिया की सूचना दी है ।
- पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने भारत के Adampur एयर बेस पर तैनात S‑400 सिस्टम को नष्ट कर दिया है, जिसका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से 13 मई, 2025 को एयर बेस का दौरा कर सभी तथ्यों का खंडन किया था ।
🤝 रक्षा सहयोग पर आगे की संभावनाएँ
- बाबुश्किन ने संकेत दिया है कि भारत‑रूस एयर डिफेंस तथा एंटी‑ड्रोन सिस्टम में भी सहयोग बढ़ाने पर बातचीत कर रहे हैं ।
- इसी संदर्भ में चीन में आयोजित SCO बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके रूसी समकक्ष एंड्रे बेलोउसॉव ने परियोजनाओं जैसे Su‑30MKI अपग्रेडेशन और अन्य रक्षा खरीद पर भी विस्तार से चर्चा की ।
🇮🇳 भारत की आत्मनिर्भर रक्षा पहल
- जबकि विदेशी हथियारों का आयात जारी है, भारत DRDO की “प्रोजेक्ट कुशा” के तहत एक घरेलू लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम विकसित कर रहा है जिसे 2028–29 के आसपास सेवा में लाया जाना है ।
- प्रोजेक्ट कुशा को आधुनिक रक्षा क्षमताओं के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
🧭 निष्कर्ष
- रूस ने पुष्टि की है कि भारत को शेष दो S‑400 स्क्वाड्रन 2026 (या अधिकतम 2027) तक सौंप दिए जाएंगे।
- यह सौदा भारत की वायु रक्षा संरचना को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण है, विशेष

